■ *पीड़ित के मामले में न्यायालय ने एफ. आई.आर. दर्ज कर विवेचना के दिए आदेश*
■ *करीब दो माह में हुई आधा दर्जन से अधिक सुनवाई, न्यायालय ने 15 दिन में आख्या प्रस्तुत करने का दिया निर्देश*
औरैया
जनपद औरैया के थाना अजीतमल से संबंधित एक मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/फास्ट ट्रैक कोर्ट, औरैया ने विकास कुमार द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना-पत्र पर सुनवाई करते हुए संबंधित थानाध्यक्ष को प्राथमिकी दर्ज कर विधि के अनुसार विवेचना करने तथा 15 दिनों के भीतर आख्या न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने अपने आदेश में मामले को संज्ञेय प्रकृति का बताते हुए साक्ष्य संकलन के लिए पुलिस विवेचना आवश्यक मानी है।
विकास कुमार की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना-पत्र में आरोप लगाया गया कि उनकी पत्नी दिनांक 17 जुलाई 2026 की रात्रि में ससुराल से चली गईं। अगले दिन सुबह लगभग छह बजे परिवार के लोगों को जानकारी हुई कि पत्नी घर में मौजूद नहीं हैं। इसके बाद घर में रखे लगभग पांच लाख रुपये मूल्य के आभूषण तथा लगभग 15 हजार रुपये की नकद धनराशि गायब पाई गई।
प्रार्थी के अनुसार, उक्त आभूषण घर की अलमारी में रखे हुए थे, जबकि नगदी कपड़ों में रखी थी।
प्रार्थना-पत्र में एक अन्य व्यक्ति की भूमिका पर भी संदेह व्यक्त करते हुए उसकी संलिप्तता की जांच किए जाने की मांग की गई थी। प्रार्थी ने आरोप लगाया कि घटना के समय उसे घर के निकट देखा गया था।
थाना स्तर पर कार्रवाई न होने पर विकास कुमार ने मा0 न्यायालय की शरण ली ,विकास कुमार की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना-पत्र के अनुसार, घटना के बाद थाना अजीतमल में लिखित शिकायत देकर प्राथमिकी दर्ज करने तथा कथित रूप से गायब आभूषणों एवं नकदी की बरामदगी की मांग की गई थी। आरोप है कि अपेक्षित कार्रवाई न होने पर पुलिस अधीक्षक, औरैया को भी रजिस्ट्री डाक के माध्यम से प्रार्थना-पत्र भेजा गया। इसके बाद भी प्रभावी कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए विकास ने मा0 न्यायालय में प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया गया।
इस प्रकरण में न्यायालय के समक्ष प्रार्थी की ओर से अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत किये गए
प्रकरण की पैरवी कर रहे *अधिवक्ता दीपांकर मिश्रा एडवोकेट* के अनुसार, मामले में करीब दो माह के दौरान आधा दर्जन से अधिक सुनवाई हुईं। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत तथ्यों एवं उपलब्ध अभिलेखों पर विचार किया गया। अंततः दिनांक 12 अक्टूबर 2026 को मा0 न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/एफटीसी, औरैया ने प्रार्थना-पत्र स्वीकार करते हुए संबंधित थानाध्यक्ष को प्राथमिकी दर्ज कर विधि के अनुसार विवेचना करने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि प्रस्तुत प्रकरण की गंभीरता और अपराध की प्रकृति को देखते हुए मामले की सत्यता की जांच के लिए विवेचना कराया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। आदेश में संबंधित थानाध्यक्ष को प्रार्थना-पत्र में वर्णित कथनों के आधार पर सुसंगत धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर विधि के अनुसार विवेचना करने तथा 15 दिनों के भीतर आख्या न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
إرسال تعليق
If You have any doubts, Please let me know