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सोने की बढ़ी कीमतों से महिलाओं में उदासी*

*सोने की बढ़ी कीमतों से महिलाओं में उदासी*

*आर्टिफिशियल जेवरात से बचा रही इज्जत*

*बिधूना,औरैया।* त्योहारों व शादी विवाह की सहालग का दौर शुरू होने के बावजूद सर्राफा व्यापारियों के यहां सन्नाटा पसरा नजर आ रहा है। 50 हजार रुपए के पार हो गया है। सोने की बढ़ी कीमतों से गरीब तबके के लिए आभूषण अब स्वप्न सा लगने लगे हैं। मध्यम वर्गीय परिवार भी सोने चांदी से दूरी बनाने को विवश है। सोने की बेतहाशा बढ़ी कीमतों के कारण अब आर्टिफिशियल ज्वेलरी से ही महिलाओं को काम चलाने की नौबत आने से महिलाओं में काफी उदासी है।
सोने के आभूषण महिलाओं की सुंदरता का अहम हिस्सा माना जाता है। शादी में महिलाएं सोने के आभूषणों के जरिए साज श्रृंगार करती हैं। खासकर नई नवेली दुल्हनें के लिए सोने के जेवरात की खासी आवश्यकता होती है, लेकिन इस समय सोने की महंगाई इस कदर बढ़ गई है कि आम गरीब परिवार तो शादी के लिए जेवर तक नहीं जुटा पा रहे हैं। पिछले लगभग 2 साल से गरीब परिवारों में हुई कन्याओं की शादी में पुराने रखे जेवर से ही काम चलाए जाने की मजबूरी बनी देखी गई है। वहीं मध्यम वर्गीय परिवार भी इस महंगाई से अछूते नहीं हैं। उनके यहां भी शादियों में जेवरातों की संख्या में भारी कटौती करना मजबूरी हो गया है।
सोने की कीमतें बढ़ने का आलम यह है कि सोना 50 हजार रुपए के पार पहुंच गया है। सर्राफा व्यवसायियों का मानना है कि सोने चांदी की कीमतों में और अधिक बढ़ोतरी हो सकती है। सर्राफा व्यवसाई पप्पू वर्मा, अरविंद कुमार, कृष्ण कुमार वर्मा, आशीष वर्मा व चुनमुन स्वर्णकार आदि का कहना है कि महंगाई के कारण सर्राफा व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित है। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष व्यवसाय में 50 फ़ीसदी तक की कमी आई है। इसका प्रमुख कारण महंगाई के कारण पुराने जेबरातों से ही लोगों द्वारा काम चलाया जाना व आर्टिफिशियल जेवरात का सहारा लिया जाना है। सोने की बढ़ी कीमतों से आहत अनीता शाक्य, राज कुमारी, नीलम, मुन्नी देवी व माया सिंहआदि महिलाओं का कहना है कि अब सोने के जेवरात स्वप्न की बात होती नजर आ रहे हैं, क्योंकि महंगाई के कारण सोने के जेवरात बनवाना काफी मुश्किल है, ऐसे में पुराने से ही काम चलाना मजबूरी है। राधा देवी, सुमन व कुसुम पाल आदि का कहना है कि कोई भी वर्ग सोने की महंगाई से प्रभावित होने से अछूता नहीं है। उनका कहना है कि धनाढ्य वर्ग भी अब उस संख्या में जेवरात नहीं बनवाता है जितने पहले बनवाता था। अब आर्टिफिशियल जेवरात के बढे चलन से महिलाओं की इज्जत बच रही है। हालांकि महिलाओं सोने की बेतहाशा बढ़ी कीमतों के चलते काफी उदास है।

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