संसाधनों के अभाव में भी जंग लड़ रहा फायर ब्रिगेड
जनपद की 14 लाख की आबादी को आग से बचाने के लिए फायर ब्रिगेड की 5 गाड़ियां और मात्र 22 का स्टाफ है
औरैया। जिले की आबादी कमोबेश 14 लाख के करीब है। आग से बचाने के लिए फायर ब्रिगेड की जिले में मात्र 5 गाड़ियां और 22 जवानों का स्टाफ है। फायर ब्रिगेड की गाड़ी चलाने के लिए चालकों की संख्या भी कम है। ऐसी स्थिति में इधर- उधर के चालक फायर ब्रिगेड की गाड़ियां दौड़ा रहे हैं। जिले में आगजनी की घटनाएं घटित होती रहती हैं। विभाग के पास संसाधनों का अभाव है। संसाधनों के अलावा विभाग के पास मैन पावर की काफी कमी है , ना तो अधिकारी पूरे हैं और ना ही फायर कर्मचारी पर्याप्त हैं। जनपद में इतनी बड़ी आबादी पर सिर्फ 5 गाड़ियां हैं। प्रमुख बाजारों में गलियां इतनी सकरी हैं , कि वहां बड़ी गाड़ियां पहुंचना मुश्किल हो जाता है। सरकारी विभागों , अस्पतालों , बैंकों , मॉल आदि ऐसे स्थान है , जहां लोगों की भीड़ रहती है। वहां आग के बचाव के संसाधन नाकाफी हैं। कई इमारतों में पुराने अग्निशामक यंत्र लगे हुए हैं , जो काफी दिनों से प्रयोग में ना होने से बेकार हो गए हैं। विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को उन्हें चलाने की जानकारी भी नहीं है।
शहर के अस्पतालों में आग बुझाने की टूटे-फूटे इंतजाम हैं , वही पुराने सिलेंडर लगे हैं। तो कहीं सिर्फ खुटिया ही बची हैं। 50 शैय्या जिला अस्पताल में आग की घटनाओं से निपटने के लिए विभाग की ओर से किए गए इंतजाम नाकाफी हैं। सोमवार को स्वतंत्र चेतना टीम ने अस्पताल की पड़ताल की। ओपीडी वार्ड में अग्निशमन यंत्र की खुटिया खाली पड़ी थी। शहर के प्रमुख भीड़भाड़ वाले इलाकों के अलावा स्कूल व कॉलेज जहां हजारों की संख्या में बच्चे पढ़ने जाते हैं , वहां भी सुरक्षा के इंतजामों के साथ लापरवाही दिख रही है। नगर में संचालित कोचिंग सेंटरों में भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। प्रशासन की ओर से सख्ती होते ही लोग बाजार से सिलेंडर खरीद कर टांग लेते हैं। कई बार बसों व अन्य सवारी वाहनों में भी आग की घटनाएं घटित हुई हैं। ऐसे में सड़कों पर दौड़ने वाले अधिकांश वाहनों में फायर सेफ्टी किट नहीं है। अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। परिवहन विभाग की कई गाड़ियां बिना किट के लंबे रूटों पर दौड़ रही हैं। जिसके चलते यात्रियों की सुरक्षा को लेकर विभाग की लापरवाही साफ दिखाई दे रही है। जनपद में अस्पतालों का निरीक्षण करने के बाद फायर ब्रिगेड की ओर से सीएमओ डॉ अर्चना श्रीवास्तव को पत्र लिखकर अस्पतालों में आग की घटनाओं सुरक्षा के लिए व्यवस्था चाक-चौबंद करने को कहा गया है। विभाग की ओर से भेजी गए पत्र में कहा गया है , कि कई जगह अस्पतालों में अग्निशामक यंत्र प्रयोग में ना आने से काफी पुराने हो गए हैं। इसलिए सभी यंत्रों को क्रियाशील रखें। कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। एफएसएसओ अतुल त्रिपाठी का कहना है कि अधिकांश आग की घटनाएं लोगों की लापरवाही के चलते घटित होती हैं। बीड़ी , सिगरेट पीकर लोग सड़क पर फेंक देते हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में खाना बनाने के बाद महिलाएं चूल्हे की आग ऐसे ही छोड़ देती हैं। घरों में महिलाएं सिलेंडर की रबड़ पर ध्यान नहीं देती हैं। अधिकांशतः बिजली के चलते आग लगती है। खेतों पर भी जलती हुई माचिस की तीली अथवा सुलगती हुई बीड़ी , सिगरेट फेंकने से आग की घटनाएं घटित हो जाती हैं। जिससे किसानों की फसल तबाह हो जाती है। फायर ब्रिगेड आग की घटनाओं से निपटने के लिए पूरी तल्लीनता के साथ काम कर रहा है।
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