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औरैया में फार्मासिस्ट कर्मचारियों ने सीएमओ कार्यालय में मांगो को लेकर किया धरना प्रदर्शन

वेतन उच्चीकरण, प्रिस्क्रिप्शन अधिकार, संवर्ग पुनर्गठन,पदनाम परिवर्तन सहित 20 सूत्रीय मांगो को लेकर फार्मेसिस्ट एसोसिएशन का प्रदेशव्यापी आंदोलन सी एम ओ कार्यालय में एक दिवसीय धरने के साथ शुरू
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औरैया
 सी एम ओ कार्यालय पर धरना, प्रदर्शन और माननीय मुख्यमंत्री को ज्ञापन के साथ ही प्रदेश के फार्मेसिस्टों का आंदोलन 4 दिसम्बर से शुरू हो गया है ।
डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के आह्वान पर चिकित्सा विभाग की धुरी कहे जाने वाले फार्मेसिस्टों ने शासन से लगातार अनुरोध करते रहने के बाद कोई निर्णय ना होते देख , प्रशासन द्वारा फार्मेसिस्ट संवर्ग के प्रति नकारात्मक रवैया अपनाए जाने का आरोप लगाते हुए आंदोलन का आगाज कर दिया है ।  डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन के प्रान्तीय उपाध्यक्ष डॉ श्याम नरेश दुबे ने धरने को संबोधित करते हुए  कहा कि 5 दिसम्बर से 8 दिसम्बर तक काला फीता बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे जो आगे चलकर अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल जायेगा । 
सीएम ओ कार्यालय पर हुए
धरने में जिला चिकित्सालय, महिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत फार्मेसी संवर्ग के अधिकारी कर्मचारियों ने भागीदारी की ।
 डीपीए औरैया के अध्यक्ष डॉ आई पी सिंह  ने कहा है कि संघ लगातार सरकार और शासन को पत्रो के माध्यम से अपनी माँगो से अवगत कराता रहा है, लेकिन शासन द्वारा कोई कार्यवाही नही की जा रही । सीमित औषधियों के प्रिस्क्रिप्शन लिखने के अधिकार दिए जाने का प्रस्ताव, पद नाम परिवर्तन का प्रस्ताव शासन में लंबित है । कार्य एवं दायित्व को देखते हुए वेतन उच्चीकरण की मांग पर वेतन कमेटी की रिपोर्ट पिछले 5 साल से वित्त विभाग में धूल खा रही है । लगभग 20 सालो से भत्तो का पुनरीक्षण नहीं हो सका है । शासन स्तर पर कई बार वार्ताओं में बनी लिखित सहमति के बाद भी उच्च पदों का सृजन नहीं हो पाया । 
जिला मंत्री डॉ विवेक गुप्ता ने कहा कि पदों का पुनर्गठन ना होने से ज्यादातर फार्मेसिस्ट प्रोन्नति के लाभ से वंचित होकर सेवानिवृत्त हो जाते हैं । संवर्ग में सृजित दो उच्च पद विशेष कार्य अधिकारी फार्मेसी एवं संयुक्त निदेशक फार्मेसी के एकल पद विगत 5 वर्षों से रिक्त पड़े हुए हैं, प्रभारी अधिकारी फार्मेसी के लगभग 40 से अधिक पद एवं चीफ फार्मेसिस्ट के सैकड़ों पद रिक्त हैं, जिन पर पदोन्नतियां नहीं की गई । ट्रामा सेंटर में अभी तक फार्मेसिस्ट के एक भी पद सृजित नहीं है जिससे वहां पर अन्य चिकित्सालयों के फार्मेसिस्टों को संबद्ध कर उधार से कार्य संचालित किया जा रहा है । सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सा सुविधाएं 24 घंटे संचालित हो रही हैं परंतु मानक में मात्र 2 पदों के सृजन का प्रावधान है जिससे 1-1 फार्मेसिस्ट 24 से 48 घंटे कार्य कर रहा है । शासन द्वारा ड्रग वेयरहाउस बनाये गए परंतु उसमें पद सृजित नहीं हुए, अन्य चिकित्सालयों के फार्मेसिस्टो को संबद्ध किया गया है, जिससे वहां का कार्य प्रभावित है ।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष डॉ प्रमोद त्रिपाठी ने ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सको की अनुपस्थिति में फार्मेसिस्ट चिकित्सीय कार्य करते हैं , परंतु उन्हें प्रभार भत्ता के नाम पर मात्र ₹75 प्रतिमाह दिया जाता है साथ ही चिकित्सीय कार्य को अभी तक विधिक मान्यता नहीं दी गई,  संघ का कहना है कि उनकी सभी मांगें न्यायोचित है एवं जनहित में है । माँगो की पूर्ति होने से जनता को अच्छी गुणवत्ता युक्त चिकित्सा सुविधाएं प्राप्त होगी ।
संघ ने माननीय मुख्यमंत्री जी से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि संघ आंदोलन नहीं चाहता लेकिन शासन द्वारा उनके प्रति नकारात्मक रवैया अपनाए जाने से आंदोलन किया जाना मजबूरी बन रही है । 
संघ ने सभी माँगो पर निर्णय कर शासनादेश निर्गत करने की मांग की है 
धरने में डा घनश्याम गुप्ता, डा संदीप सेंगर, डा अनिल पाल, डा नीरज पति त्रिपाठी, डा राम गोपाल बाजपेयी, डा विपिन अग्निहोत्री, डा नरेंद्र नारायण, डा मानसिंह पाल, डॉ कुलदीप, डॉ विक्रम सिंह, डॉ सुधीर कटियार, डॉ अवनीश, डॉ दीपेंद्र मिश्रा, डॉ ऋषि मुनि, डॉ राकेश बाथम, डॉ के पी सिंह, डॉ प्रमोद यादव आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे.

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