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वतन वापसीः काबुल में फंसा जौनपुर का बेटा लौटा घर, आंखों से छलक पड़े खुशी के आंसू, बहनों ने ने बांधी राखी

वतन वापसीः काबुल में फंसा जौनपुर का बेटा लौटा घर, आंखों से छलक पड़े खुशी के आंसू, बहनों ने ने बांधी राखी
उत्तरप्रदेश न्यूज़21 वरिष्ठ संवाददाता:जौनपुर के मयंक कुमार सिंह काबुल स्थित खान स्टील लिमिटेड कंपनी में महाप्रबंधक थे। अफगानिस्तान में बिगड़े हालात में वह भी फंस गए थे। हालांकि उनकी बात परिवार के लोगों से लगातार हो रही थी, लेकिन वहां की स्थिति के बारे में जानकारी होने पर परिवार के लोग डर गए थे। 

घर पहुंचने पर मयंक को बहन ने बांधी राखी
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में फंसे जौनपुर के रहने वाले मयंक रविवार सुबह अपने घर पहुंचे। परिजनों को देख उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। मयंक के परिवार वालों सहित ग्रामीणों के चेहरे पर मुस्कान तैर गई। घर लौटने पर बहनों ने मयंक को राखी बांधी वहीं परिजनों ने माला पहना कर स्वागत किया। वहीं, उनकी दोनों बहनों ने राखी बांधी।
काबुल एयरपोर्ट के समीप एक स्टील फैक्ट्री में फंसे 27 भारतीयों में से जौनपुर लाइन बाजार थाना क्षेत्र के गोधना गांव निवासी मयंक कुमार सिंह भी थे। भारतीयों के दल की वतन वापसी रविवार को ही हुई थी। सभी दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरे थे।
शाम में मयंक सुहेलदेव एक्सप्रेस ट्रेन पर सवार हुए और रविवार सुबह जौनपुर उतरे।  मयंक के छोटे भाई शशांक सिंह सहित कई ग्रामीण स्वागत के लिए स्टेशन पर पहुंचे थे। मयंक के घर लौटने से उनकी पत्नी आंचल, बेटा आदित्य सहित परिवार के सभी लोग काफी खुश नजर आ रहे हैं।

लाइन बाजार थाना क्षेत्र से कचगांव रोड पर पांच किमी दूर गोधना गांव है। यहां के निवासी सत्य प्रकाश सिंह के बेटे मयंक कुमार सिंह काबुल स्थित खान स्टील लिमिटेड कंपनी में महाप्रबंधक थे। कंपनी परिसर काबुल एयरपोर्ट से दो किमी दूरी पर है। इस समय मयंक काबुल स्थिति फैक्ट्री में ही थे।
वह नवंबर 2018 को काबुल गए थे और इसी साल जून माह में आना चाहते थे, लेकिन किन्हीं कारणों से नहीं आ पाए। उधर, अफगानिस्तान में बिगड़े हालात में वह भी फंस गए थे। हालांकि उनकी बात परिवार के लोगों से लगातार हो रही थी, लेकिन वहां की स्थिति के बारे में जानकारी होने पर परिवार के लोग डर गए थे। पूरा परिवार टीवी पर नजर लगाए रहता था। सभी मयंक के सलामती की दुआ कर रहे थे।
बहनों ने बांधी राखी
काबुल में फंसे मयंक रविवार सुबह अपने घर पहुंचे। बेटे को सही सलामत देख स्वजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े तो दोनों बहनों आकांक्षा और अपूर्वा सिंह के  लिए तो ये रक्षाबंधन का सबसे बड़ा उपहार था। भाई के काबुल में फं से होने की खबर से दोनों बहनों की जान सांसत में फंसी हुई थी। पिछले दो साल से भाई को खुद राखी न बांध पाने की कसक दोनों बहनों ने इस बार के वहां से सकुशल लौट आने पर तुरंत मिटाई। घर पहुंच कर भाई को रक्षा सूत्र बांधा।

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