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बच्चे के दांत निकलते समय खून बहे तो हीमोफीलिया की आशंका

उत्तर प्रदेश न्यूज21

●विश्व हीमोफिलिया दिवस आज (17 अप्रैल )
 
•रक्तस्राव संबंधी एक अनुवांशिक रोग है हीमोफीलिया 
•10 हज़ार लोगों में किसी एक को होती है ऐसी बीमारी
•कुंडली की तरह शादी से पहले जाने मेडिकल हिस्ट्री, बचें कई अनुवांशिक रोग से 
कानपुर:यदि आपके बच्चे के दांत निकल रहे हैं और उसके मसूढ़ों से लगातार खून बह रहा है तो सावधान हो जाइए क्योंकि यह हीमोफिलिया के लक्षणों में से एक है। जी हां, हीमोफिलिया एक अनुवांशिक बीमारी है। इसमें शरीर से लगातार रक्तश्राव होता है। हालांकि यह समस्या लगभग दस हज़ार में से कहीं एक को होती है। आमतौर पर देखा गया है चोट लगने या घाव होने के बाद खून निकलता है और कुछ देर बाद अपने आप या फर्स्ट एड करने पर खून का बहाव बंद हो जाता है, लेकिन अगर कोई हीमोफिलिया से पीड़ित है तो ऐसा नहीं होता। खून अपने आप बहना बंद नहीं होगा। न ही शरीर में ऐसे तंत्र काम करेंगे जो खून को बहने से रोकने में सक्षम हों। 

क्या है हीमोफिलिया 

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के शिशु विभाग के प्रोफेसर डॉ॰ एके आर्य बताते हैं कि यह रोग माँ बाप से बच्चे पर आता है यानी यह रोग अनुवांशिक होता है। इस रोग से पीड़ित लोगों में क्लोटिंग फैक्टर अर्थात खून के थक्के बनना बंद हो जाते हैं। सामान्य लोगों में जब चोट लगती है तो खून में थक्के बनाने के लिए ज़रूरी घटक खून में मौजूद प्लेटलेट्स से मिलकर उसे गाढ़ा कर देते हैं। इस तरह खून अपने आप बहना बंद हो जाता है, लेकिन जो लोग हीमोफिलिया से पीड़ित होते हैं, उनमें थक्के बनाने वाला घटक बहुत कम होता या होता ही नहीं है। इसलिए उनका खून ज्यादा समय तक बहता रहता है। अक्सर इस रोग का पता आसानी से नहीं चलता है, जब बच्चे के दांत निकलते हैं और खून बहना बंद नहीं होता तब इस बीमारी के बारे में पता चल सकता है। 

ऐसे होता है इलाज 

डॉ. आर्य  बताते हैं जिस तरह शादी से पहले कुंडली मिलाई जाती है उसी प्रकार आने वाले गंभीर बीमारियों जैसे डायबिटीज, हीमोफिलिया, कैंसर, रोगों से बचने के लिए मेडिकल हिस्ट्री जानना बहुत ज़रूरी है। साथ ही गर्भधारण से पूर्व माता और पिता का मेडिकल चेकअप होना बहुत आवशयक है। इस तरह से समय रहते इलाज होना संभव होता है। 

हीमोफिलिया के प्रकार 

• हीमोफिलिया ए – यह बेहद सामान्य प्रकार का हीमोफिलिया होता है, इसमें रक्त के थक्के बनने के लिए आवश्यक “फैक्टर 8” की कमी हो जाती है। 
• हीमोफिलिया बी – यह दुर्लभ प्रकार का हीमोफिलिया होता है, इसमें क्लोटिंग “फैक्टर 9” की कमी हो जाती है। 

हीमोफिलिया के लक्षण 

मांसपेशियों एवं जोड़ों में रक्तस्त्राव या दर्द होना  
शरीर पर लाल, नीले व काले रंग के गांठदार चकत्ते
चिड़चिड़ापन, उल्टी, दस्त, ऐठन, चक्कर, घबराहट आदि
सांस लेने में समस्या
खून या काला गाढ़े घोल जैसे पदार्थ की उल्टी करना 

और भी जानें इस रोग को 

नेशनल हेल्थ पोर्टल के अनुसार लगभग दस हज़ार पुरुषों में से एक पुरुष को हीमोफिलिया होने का खतरा रहता। महिलाएं इस रोग के वाहक के रूप में ज़िम्मेदार होतीं हैं। 

हर साल 17 अप्रैल को मनाया जाता है ये दिवस

हीमोफिलिया बीमारी को लेकर जागरूकता के लिए हर वर्ष 17 अप्रैल को विश्व हीमोफिलिया दिवस मनाया जाता है। यह विश्व फेडरेशन ऑफ़ हीमोफिलिया की एक पहल है। इस वर्ष की थीम– एडॉप्टिंग द चेंज सस्टेनिंग केयर इन अ वर्ल्ड यानी 'एक नई दुनिया, जिसमें निरंतर देखभाल की आदत डालना' है।

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