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विश्व हीमोफिलिया दिवस (17 अप्रैल) पर विशेष बिना वजह बहे खून तो हो जाएं सतर्क रक्तस्राव संबंधी एक अनुवांशिक बीमारी है हीमोफीलिया

उत्तर प्रदेश न्यूज21
●आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई स्थित हीमोफीलिया यूनिट में है निशुल्क इलाज
इटावा:शरीर का कोई हिस्सा कट जाने  के बाद ख़ून बहता है लेकिन रुक नहीं पाता। थक्के बनाने के लिए जरूरी घटक खून में मौजूद प्लेटलेट्स से मिलकर उसे गाढ़ा करते हैं । इसके बाद खून बहना बंद होता है। जिन लोगों को हीमोफीलिया होता है उनमें खून के थक्के बनाने वाले घटक बहुत कम होते हैं। नियमित इलाज से हीमोफीलिया की रोकथाम की जा सकती है। बेवजह खून बह रहा हो तो आप जांच कराएं हो सकता है कि आप हीमोफीलिया का शिकार हों। यह कहना है बाल रोग विभाग यूपीयूएमएस ( सैफई) के असिस्टेंट प्रोफेसर व नोडल ऑफिसर (थैलेसीमिया) डॉ योगेंद्र यादव का। 
डॉ यादव ने बताया कि जनपद में आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में हीमोफीलिया यूनिट लगभग 4 वर्षों से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) द्वारा बाल रोग विभाग में संचालित है। इसके अंतर्गत लगभग 50 हीमोफीलिया मरीज पंजीकृत हैं  ।इन सभी मरीजों के लिए संपूर्ण इलाज व जांच निशुल्क उपलब्ध है। यहां हीमोफीलिया के इलाज हेतु फैक्टर 8 व फैक्टर 9 पर्याप्त मात्रा में निशुल्क उपलब्ध है। हीमोफीलिया' ए 'और 'बी' के समस्त मरीजों के उपचार व फैक्टर 8 और 9 हेतु उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में प्रतिदिन अनवरत सुविधाएं प्रदान की जा रही है। डॉ यादव ने बताया हीमोफीलिया के प्राथमिक उपचार को सेक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी कहा जाता है। इसमें कमी वाले फैक्टर को क्लोटिंग फैक्टर 8 हीमोफीलिया ए के लिए या क्लोटिंग फैक्टर 9 हीमोफीलिया बी के लिए की सांद्रता से रिप्लेस किया जाता है। इसमें रक्त प्लाज्मा से एकत्र और शुद्ध किया जाता है या कृत्रिम रूप से प्रयोगशाला में उत्पादित किया जा सकता है यह सीधे रक्त में एक नस के माध्यम से रोगी को इंजेक्शन के रूप में दिए जाते हैं।सैफई मेडिकल कॉलेज के प्रोफ़ेसर व बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ राजेश कुमार यादव ने बताया कि हीमोफीलिया एक अनुवांशिक ब्लीडिंग डिसऑर्डर है। इसमें रक्त मैं  थक्के नहीं बन पाते। नार्मल ब्लड में प्रोटीन होते हैं जिसे क्लोटिंग फैक्टर्स कहते हैं। और यह फैक्ट्स खून बहने को रोकते हैं। लेकिन जिन लोगों को हीमोफीलिया होता है उनमें इस फैक्टर्स का स्तर काफी कम होता है। जिस कारण शरीर में रक्त का बहना नहीं रुकता और स्वास्थ्य से जुड़े कई समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं ।यह बीमारी एक प्रकार की जींस में हुए बदलाव के कारण उत्पन्न होती है जिस  कारण उनके शरीर के हिस्से में चोट लगने या दुर्घटना होने पर शरीर में रक्त थक्का जमा नहीं हो पाता और असामान्य रूप से बहने लगता है।डॉ यादव ने बताया जिन बच्चों में हीमोफीलिया होता है उनके शरीर पर नीले निशान का बनना, नाक से खून बहना, आंख के अंदर खून का निकलना,तथा जोड़ों की सूजन आदि लक्षण देखे जाते हैं। उन्होंने कहा हमारे पास अब यकीनन ऐसी क्षमता है जिसमें एकल उपचार के उपयोग से हीमोफीलिया पीड़ित में बदलाव लाया जा सकता है यह बड़ी उपलब्धि है।
हीमोफीलिया के प्रकार
हीमोफीलिया 'ए'यह हीमोफीलिया का एक साधारण प्रकार है इस प्रकार के हीमोफीलिया में रक्त में थक्का बनने के लिए आवश्यक फैक्टर 8 की कमी हो जाती है। 
हीमोफीलिया 'बी हीमोफीलिया बी एक अनुवांशिक रक्त विकार है । यह माता-पिता से बच्चों में आने वाले जींस में खराबी से होता है। कभी-कभी यदि जन्म से पहले जींस में किसी प्रकार का बदलाव  आ जाए (म्यूटेशन) तो ऐसी स्थिति में भी होने वाले बच्चे को हीमोफीलिया 'बी' हो सकता है।हर साल 17 अप्रैल को मनाया जाता है ये दिवस हीमोफिलिया बीमारी को लेकर जागरूकता के लिए हर वर्ष 17 अप्रैल को विश्व हीमोफिलिया दिवस मनाया जाता है। यह विश्व फेडरेशन ऑफ़ हीमोफिलिया की एक पहल है। इस वर्ष की थीम– एडॉप्टिंग द चेंज सस्टेनिंग केयर इन अ वर्ल्ड यानी 'एक नई दुनिया, जिसमें निरंतर देखभाल की आदत डालना' है।

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