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निजीकरण पर विद्युत कर्मचारियों का विरोध जारी

नवनीत गुप्ता उत्तर प्रदेश न्यूज21ऑल इंडिया प्रेस एसोशियेशन (AIPA)
औरैया :विद्युत उद्योग के निजीकरण करने की सरकार की मंशा का विरोध निरंतर बढ़ता जा रहा है। एक सप्ताह से चल रहा धरना प्रदर्शन, कार्य बहिष्कार शनिवार को भी जारी रहा। समाधान न निकलने पर हड़ताल की स्थिति भी बन सकती है।
प्रभारी अधीक्षण अभियंता एसएल अग्निहोत्री ने बताया कि विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उप्र के निर्देशों पर जारी धरना प्रदर्शन निरंतर चलेगा। कभी वह काम करते हुए अपना विरोध जता रहे हैं। पांच सितंबर से अनिश्चितकालीन धरना कर कार्य बहिष्कार होगा। यह आंदोलन हड़ताल में भी बदल सकता है। सरकार पूर्वांचल को निजी हाथों में सौंपने की संस्तुति वापस ले। निजीकरण कतई उपभोक्ताओं व कर्मचारियों के हितों में नहीं है। बिजली उपभोक्ता विभाग का आधार हैं।
लाभ व हानियां पर एक नजर सार्वजनिक क्षेत्र में रहने के लाभ निजीकरण से होने वाली हानियां मंहगे दर पर विद्युत खरीदकर सस्ते दर पर बेचना सस्ते दर पर खरीदकर मंहगे दर पर बिजली की बिक्रीउपभोक्ता को विद्युत मूल्य छह रुपये की दर से है निजीकरण में कम से कम 10 रुपये प्रति यूनिट की दर से देना होगातथा ग्रामीण शहरी उपभोक्ता तीन रुपये देता हैसौभाग्य व दीनदयाल योजना के अंतर्गत खरबों जनता को सुविधा के लिए इंतजार करना होगा। निजी घरानों द्वारा कोई खर्चा नहीं किया जाएगा। समस्त
रुपये की योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं खर्च उपभोक्ताओं को वहन करना होगा।
मृतक आश्रितों को सेवायोजन कोई सुविधा नहीं
विद्युत उद्योग जन सूचना के दायरे में जन सूचना का अधिकार लागू नहींराजस्व वसूली में नियमानुसार कार्रवाई की जाती है मनमाने तरीके से जबरदस्ती वसूली की जाएगी।इन परिस्थितियों में अधीक्षण अभियंता सहित विद्युत इंजीनियरों ने उपभोक्ताओं से अनुरोध किया है कि वह निजीकरण के दुष्परिणामों से बचने के लिए आंदोलन में सहयोग करें। जिले के सभी कर्मचारी अधिकारी धरना प्रदर्शन में मौजूद रहे।

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