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विकास की आस में पीपरी नोरेजपुर ।

संवाददाता दीपेन्द्र कुमार उत्तर प्रदेश न्यूज़21

प्रदेश सरकार द्वारा गांव गांव में विकास के लिए करोड़ों रुपए   भेजे जाते हैं जिनसे गांव का विकास हो सके । लेकिन कुछ गाँव तो विकास की ओर अग्रसर है तो कुछ विकास से बहुत दूर। कहीं-कहीं सरकारी पैसे का बंदरबांट हो जाता है तो कहीं सही उपयोग। जनपद जालौन के  ब्लॉक कुठौंद के अंतर्गत आने वाले कई ऐसे गांव है जहां पर आज भी धरातल पर कुछ नहीं है लेकिन कागजों में विकास की गंगा बह रही है। सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में पानी की संमुचित व्यवस्था के लिए टंकियो का निर्माण किया गया है लेकिन पीपरी नोरेजपुर में बनी पानी की टंकी सफेद हाथी नजर आ रही है। जिसमें ग्रामीणों ने बताया कि ठेकेदार और इंजीनियर की नोंक झोंक के चलते अभी तक कार्य पूरा नहीं हो सका है और वह बदहाली के आंसू बहा रही है जिसमें एक बूंद पानी को छोड़िए जनाब अभी तक उसका कार्य भी पूरा नहीं हुआ। नोरेजपुर में प्राथमिक विद्यालय की बाउंड्रीवाल टूटी पड़ी है जिससे आवारा मवेशी उसमें विचरण करते रहते हैं तथा बच्चों के साथ भी हादसा होने का खतरा रहता है। गांव में सफाई व्यवस्था भी चौपट दिख रही है। ग्रामीणों का कहना है कि एक सफाई कर्मी के भरोसे इतनी बड़ी ग्राम पंचायत है जिससे गांव में साफ सफाई सही तरीके से नहीं हो पाती यदि गांव में एक सफाई कर्मी और तैनात किया जाए तो सफाई व्यवस्था भी समुचित रूप से संचालित हो सकेगी । नाली खड़ंजा टूटे हुए हैं । यह स्थिति एक दो गांव की नहीं है लगभग ब्लॉक कुठौंद के आधे गांव इन्ही समस्याओं से जूझ रहे हैं ग्राम प्रधान से लेकर उच्च अधिकारियों तक सरकारी पैसे का बंदरबांट हो जाता है और कार्य को कागजों में दिखाकर धन उगाही की जाती है और गांव के बाशिन्दे बदहाली की जिंदगी जीते रहते हैं। भ्रष्टाचार की चरम सीमा इतनी बढ़ती जा रही है सरकार की सभी  योजनाओं को उनके नुमाइंदे  ही चूना लगाने पर तुले रहते हैं। मनरेगा का तो यह हाल है साहब की एक ही फोटो पर पेमेंट की निकासी हो रही है और 20 परसेंट का खेल खेला जा रहा है जिसमें प्रधान या रोजगार सेवक अपने चहेते लोग ही खुश कर पाते हैं और बाकी की जनता खामोशी से ऐसा नजारा देखती रहती है। भ्रष्टाचार की शुरुआत एक गांव से ही शुरू होकर बड़े पैमाने तक जाती है। अब गांव का मुखिया प्रधान भी करे तो क्या करें उसे भी अपना काम करवाने के लिए उच्च अधिकारियों के साथ परसेंटेज का बंदरबाट करना पड़ता है यदि वह ऐसा नहीं करता है तो वह 5 साल हाथ मलता रहेगा और उसे कुछ भी नसीब नहीं होगा।जितना उसने चुनाव जीतने में अपना खर्चा किया था वह भी पैसा निकालने में असफल रहेगा इसलिए भ्रष्टाचार की शुरुआत जब उत्पन्न हो जाती है जब चुनाव आता है । क्योंकि जनता मुर्गा दारू के नशे में ऐसा प्रधान चुनती है जो जीतने बाद पहले अपना उसके बाद गांव का भला सोचेगा।

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