*दीपू सिंह व उनके बेटे को मिली जमानत*
*वकील का तर्ज: घटना के ही दिन पुलिस ने क्यों नहीं लिखी एफआईआर , 2 दिन बाद दबाव में दर्ज किया गया केस*
*औरैया।* औरैया की सदर कोतवाली में प्रभारी निरीक्षक के साथ अभद्र व्यवहार व एक जाति विशेष के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में भाजपा नेता दीपू सिंह व उनके बेटे कर्मवीर सिंह को जमानत मिल गई है। सत्र न्यायालय ने 25-25 हजार मुचलके पर जमानत मंजूर की है। कोर्ट से जिला जेल में रिहाई का आदेश भेजा गया है।
बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी थी कि घटना के दिन मुकदमा नहीं लिखा गया, और 2 दिन बाद मुकदमा लिखना बता रहा है कि किसी दबाव में मुकदमा लिखा गया है। वरना पुलिस को अपना मुकदमा लिखने में क्या देरी करनी थी। कोतवाली पुलिस ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दीपू सिंह व उनके पुत्र जिला पंचायत सदस्य कर्मवीर सिंह को 1 फरवरी को गिरफ्तार किया था। इसके उपरांत न्यायालय से उन्हें जेल भेज दिया गया था। तब से दोनों आरोपी जेल में थे। 8 फरवरी को न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से जमानत खारिज होने के बाद सत्र न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की गई। जिस पर सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार वर्मा के समक्ष सुनवाई हुई। अभियोजन की ओर से डीजीसी अभिषेक मिश्रा न्यूज़ जमानत का विरोध किया, तो बचाव पक्ष के अतिवक्ता ने सभी धाराओं को गैर जमानती व मामला मजिस्ट्रेट लाइन का बताते हुए जमानत की मांग की। कहा कि इस मुकदमे में वादी स्वयं कोतवाल है। घटना 29 जनवरी को दिखाई गई, जबकि प्रथम सूचना 31 जनवरी को दिखाई गई है। कोतवाल को अपना मुकदमा लिखने में विलंब की क्या जरूरत थी? बताया कि दीपू सिंह ने कोई वैमनस्यता फैलाने का काम नहीं किया, और ना कोरोना वायरस का उल्लंघन। दीपू व उनके बेटे दोनों वैक्सीन लगवा चुके हैं। यह किसी दबाव में मुकदमा लिखाना साबित हो रहा है। दीपू सिंह जनप्रतिनिधि रहे हैं। समाज के सभी वर्गों के समन्वय का काम किया है। इसलिए यह सब जमानत के पर्याप्त आधार हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने दोनों आरोपियों की जमानत स्वीकार कर ली। दोनों को 25-25 हजार की प्रतिभू व बंद पत्र जमा कराने का आदेश दिया। औपचारिकता पूर्ण होने के बाद दोनों की रिहाई का आदेश जिला कारागार इटावा भेज दिया गया है।
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