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सरकारी तंत्र में अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि कोई भी न तो देखना चाहता है और ना ही जिसको देखने का दायित्व सौंपा जाता है वही अपनी जिम्मेदारी

बिधूना । सरकारी तंत्र में अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि कोई भी ना तो देखना चाहता है और ना ही जिसको देखने का दायित्व सौंपा जाता है वही अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन ही करता है । राजस्व विभाग में मनमानी का आलम यह है कि भूलेख से जो खतौनी निकलती है उसमें जिस अधिकृत कर्मचारी या अधिकारी का नाम होना चाहिए उसकी जगह दो साल पूर्व रिटायर हो चुके कर्मचारी का नाम आज भी आ रहा है। इसके अलावा एक सक्षम अधिकारी की जगह ऐसे का नाम आ रहा है जो एक साल पूर्व औरैया तहसील में स्थानांतरित हो चुका है।  अब आप अंदाजा लगा सकते हैं बिधूना तहसील के भू अभिलेख कार्यालय में किस तरह की अव्यवस्था कायम है । किसानों की जमीन का लेखा-जोखा जिस भूलेख में दर्ज होता है और जहां से उसे मालिकाना हक के लिए खतौनी निकलवानी होती है , वहां का आलम यह है कि आज भी यहां भूत खतौनी जारी कर रहे हैं। दो वर्ष पूर्व बंगाली बाबू यादव सेवानिवृत्त हो गए लेकिन खतौनी में उनका नाम आज भी डिजिटल हस्ताक्षर के रूप में आ रहा है ।इसी तरह एक वर्ष पहले विशाल लेखपाल का नाम सक्षम अधिकारी के रूप में दर्ज है जबकि वह औरैया तहसील में तैनात हैं । इससे  अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिधूना तहसील के भूलेख कार्यालय में किस तरह की मनमानी के कार्य हो रहे हैं ।जब भी कोई अधिकारी यहां के कुछ निरंकुश कर्मचारियों पर लगाम लगाने का प्रयास करता है तो लामबंदी शुरू हो जाती है या फिर सियासत का दौर शुरू होता है । आखिर इसका जवाब कौन सक्षम अधिकारी देगा कि जो व्यक्ति दो वर्ष पहले रिटायर हो गया फिर क्या उसकी आत्मा के नाम पर खतौनी जारी हो रही है, या फिर ऐसा जानबूझकर किया जा रहा है । जो व्यक्ति सरकारी सेवा में ही नहीं है उसके नाम से जारी की जा रही खतौनी की वैधता क्या मानी जानी चाहिए या फिर यह मान लिया जाए कि यहां के भू अभिलेखों में सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है। इस संबंध में कई बार सक्षम अधिकारियों को अवगत भी कराया गया लेकिन शायद किसी को देखने का वक्त ही नहीं मिला और सब कुछ यूं ही चलता रहा ।आज 12 नवंबर को जब खतौनी निकलवाई गई तो उसमें पूर्वक दो वर्ष पहले रिटायर कर्मचारी का नाम डिजिटल हस्ताक्षर के रूप में आ रहा है, क्या इसके लिए जो जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ कोई विधिक कार्यवाही करने के लिए उच्चाधिकारी ध्यान देंगे या फिर भविष्य में भी इसी तरह का दौर चलता रहेगा। योगी सरकार भ्रष्टाचार रोकने की बात कर रही है लेकिन बिधूना तहसील के भूलेख कार्यालय में भले ही कर्मचारी बैठते हो लेकिन जो खतौनी निकलती है उसमें सेवानिवृत्त कर्मचारियों यानी भूत के हस्ताक्षर से अभिलेख जारी हो रहे हैं।

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