*गरीबों की पहुंच से दूर फलों का राजा आम*
*मौसम में नमी रहने और बौर में लसी लगने से आम का उत्पादन हुआ प्रभावित*
*बिधूना,औरैया।* पिछले महीनों में बादल छाए रहने से मौसम में बढ़ी नमी एवं बौर में लसी लगने से आम के उत्पादन में आई भारी गिरावट के कारण इस बार फलों का राजा आम गरीबों की पहुंच से दूर नजर आ रहा है। कलमी ही नहीं देसी आम के उत्पादन में भी भारी गिरावट आई है ऐसे में महंगा हुआ आम गरीबों के लिए वेस्वाद सा दिख रहा है।
इस बार पिछले महीनों में अक्सर बादलों के छाए रहने और बारिश होने से मौसम में बढी नमी और बौर में लसी लगने से इस बार कलमी व देसी आमों की पैदावार क्षेत्र में न के बराबर है। उद्यान विभाग के वैज्ञानिकों के मुताबिक आसमान में बादलों के अधिक समय तक छाए रहने और बारिश होने से बौर में लसी एवं भुंनगा रोग लग जाता है। हालांकि इससे बचाव और निजात के लिए कई रसायनिको का छिड़काव लाभकारी होता है। बिधूना तहसील क्षेत्र में कलमी आमों की कई प्रजातियों के उत्पादन के साथ ही बड़े पैमाने पर देसी आम की पैदावार होती है, लेकिन इस बार कलमी आमों की कौन कहे देशी आम भी दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है। फल आढती मोहम्मद मुन्ना शिवप्रताप भदौरिया, मोहम्मद रजा आदि का कहना है कि इस बार आम की पैदावार में भारी गिरावट आने से सबसे ज्यादा घाटा उन व्यापारियों को हुआ है, जिन्होंने बौर आने के शुरुआती दौर में ही आम के बागों की फसल खरीद ली थी। इन फल आढतियों का यह भी कहना है कि बागवानों ने महंगी कीमत पर बागों को खरीदा है, और बाद में आम की पैदावार में भारी गिरावट आ जाने से आम के धंधे में इस बार मुनाफे की कौन कहे लागत और मेहनत निकालनी मुश्किल पड़ रही है। ऐसे में आम के कम उत्पादन के कारण आम की महंगाई भी बढ़ गई है, जिससे इस बार कलमी व देशी आम गरीबों की पहुंच से काफी दूर हुआ नजर आ रहा है।
अधिकांश आम का अचार डालने के लिए देशी आम ही काम आता है, लेकिन इस बार देशी आम भी दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में इस बार लोगों को आम का अचार चखने को तरसने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। कलमी आम इस बार 70 से 80 रुपए प्रति किलो बिक रहा है, वहीं देशी कच्चा आम 50 से 60 रुपए प्रति किलोग्राम है। ऐसे में फलों का राजा आम गरीबों की पहुंच से दूर है।
إرسال تعليق
If You have any doubts, Please let me know