इटावा नियति का अन्याय देखिए, वरमाला के समय जो हाथ परिवार की बड़ी बेटी को आशीर्वाद देने के लिए उठ रहे थे, फेरों के बाद उन्हीं हाथों से दुल्हन की अर्थी काे सजाया गया। किसी परिवार के लिए इससे अधिक कष्टप्रद और क्या होगा? नियति के इस सितम को जिसने भी महसूस किया उसकी आंखें भर आईं। गले में वरमाला पहने दूल्हे के लिए भी यह किसी हादसे से कम न था। मंगलगीत की आवाजें अचानक करुण क्रंदन में कैसे परिवर्तित हो गईं जानिए:
ये है पूरा मामला: समसपुरा निवासी स्व. रमापति की बड़ी बेटी सुरभि का विवाह इटावा जनपद के ग्राम नावली निवासी मंजेश कुमार के साथ तय हुई थी।दूल्हे ने साली के साथ रचाई शादी: वास्तव में यह मंजर बहुत दुखद था, लेकिन वृद्धजनों द्वारा चिंता व्यक्त करने के बाद दोनों पक्षों में दूल्हे की शादी सुरभि की छोटी बहन से करवा दिए जाने की सहमति बनी। बड़ी बहन की शादी में उत्साहित उसकी छोटी बहन निशा के लिए यह थोड़ा अजीब था, लेकिन स्वजन के द्वारा मनाए जाने पर उसने भी हां कर दी। इसके बाद सभी रस्मों को पूरा करते हुए दोनों का विवाह संपन्न हुआ।
एक तरफ उठी डोली, तो दूसरी ओर अर्थी: नियति के इस कुठाराघात के बाद घर की दोनों बेटियों को नम आंखों से विदाई दी गई। एक ओर बड़ी बहन का विधिवत अंतिम संस्कार हुआ और दूसरी ओर छोटी बेटी को उसके दाम्पत्य जीवन के लिए शुभकामनाएं दी गईं।
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