**ओ! भोले मतदाता सोच समझकर देना वोट**
सूट - बूट और टाई, धोती - कुर्ता पहन तने!!
कभी गरीबों कमजोरों की बात कही ना!
गिरगिट जैसे रंग बदलते क्या ये बात सही ना!!
आज वोट के चक्कर में काट रहे हैं चक्कर!
किन्तु जीत के बाद लगाए जनता चक्कर!!
ओ ! भोले मतदाता सोच समझकर देना वोट!
पड़े बाद में पछताना, गर रखी नियत में खोट!!
-- *घनश्याम सिंह*
*वरिष्ठ पत्रकार व त्रिभाषी रचयिता*
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