जब से कोरोना काल चला है तब से बच्चों को निशुल्क पढ़ाते हैं राजेश गौतम
रिपोर्ट सौरभ त्यागी
महेवा जालौन
सामुदायिक शिक्षा केन्द्र मंगरौल में चलाया जा रहा है जिसमे बच्चों को निशुल्क पढ़ाया जाता है और बच्चों को एक घंटे उनके विषय के हिसाब से पढ़ाया जाता है और एक घंटे संविधान के बारे में पढ़ाया जाता है। इस सेंटर में 32 बच्चे पढ़ने आते हैं जिन्हें राजेश गौतम प्रतिदिन समय निकालकर दो घंटे पढ़ाते हैं । राजेश गौतम एक साधारण परिवार से उनका कहना है कि गरीब परिवार के बच्चे और अच्छे से पढ़ सके और अपने अधिकारों के बारे में जान सके उनका सपना है कि आने वाले समय में अपने गांव में सभी का कार्य कर सके गाँव मे लोगों की बहुत मदद करते हैं जैसे पेंशन बनवाना लोगो आयुष्मान योजना के बारे में बताना और उसको सभी सरकारी योजना के बारे में बताना और लाभ दिलाना आदि काम करते हैं राजेश का कहना है कि आप सब अपने बच्चों को शिक्षित बनाये । बच्चों से किसी भी परिस्थिति मे काम न लिया जाए ।हम हर एक बच्चों को शोषण के चंगुल से मुक्त कराने का साहस करें, इसी में बाल दिवस की उपादेयता स्वत: सिद्ध है। हालांकि बाल अधिकार, शिक्षाधिकार, पोक्सो, जे जे एक्ट, बाल विवाह, बाल श्रम, बाल यौन शौषण एवं सुरक्षित व असुरक्षित स्पर्श के विषय में जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है, साथ ही 1098, 1090, 112 व 181 के बारे पावर प्वाइंट और टच फिल्म के माध्यम से जानकारी देकर सामूहिक चर्चा करने की कार्ययोजना बनाने की भी जरूरत है, जिससे बच्चों के साथ हो रहे हिंसा पर रोक लगें। इन मुद्दों पर सरलता और आसानी से कैसे बच्चों को जानकारी दे सकेंगे और उन्हें सुरक्षित रख सकें उसके लिए किन किन माध्यमों का प्रयोग किया जा सकता है उस पर भी चर्चा किया जाये। बाल श्रमिकों के लिए हो हेल्पलाइन ! बाल श्रमिकों की सुरक्षा व मुक्ति के लिए हेल्पलाइन नंबर स्थापित करने की आवश्यकता है। बच्चों की सुरक्षा व उनके अधिकार के प्रति और गंभीर होने की जरूरत है।
बच्चों से किसी भी परिस्थिति मे काम न लिया जाए। बच्चों की सुरक्षा के लिए नए कानून के साथ ही उनके शिक्षा व अधिकार पर भी ध्यान देना होगा। उत्तर प्रदेश में बाल श्रम एक गंभीर समस्या है। प्रशासनिक स्तर पर बाल मजदूरों को मुक्त कराने के लिए और कठोर कदम उठाने होंगे। बाल श्रमिकों के लिए सभी वर्गो व धर्मो के लोगों को आगे आना होगा। ईट-भट्ठे, कालीन, बारात में लाइट ढोने वाले, चूड़ी कारखानों में फंसे बाल मजदूरों की ओर लोगों का ध्यान खींचने की भी जरूरत है। आओ हम सब मिलकर इस बाल दिवस पर एक संकल्प ले। बाल श्रम अभिशाप है बच्चों की मासूमियत के लिए। इस अभिशाप से मुक्ति दिलाने का।
बच्चों से किसी भी परिस्थिति मे काम न लिया जाए। बच्चों की सुरक्षा के लिए नए कानून के साथ ही उनके शिक्षा व अधिकार पर भी ध्यान देना होगा। उत्तर प्रदेश में बाल श्रम एक गंभीर समस्या है। प्रशासनिक स्तर पर बाल मजदूरों को मुक्त कराने के लिए और कठोर कदम उठाने होंगे। बाल श्रमिकों के लिए सभी वर्गो व धर्मो के लोगों को आगे आना होगा। ईट-भट्ठे, कालीन, बारात में लाइट ढोने वाले, चूड़ी कारखानों में फंसे बाल मजदूरों की ओर लोगों का ध्यान खींचने की भी जरूरत है। आओ हम सब मिलकर इस बाल दिवस पर एक संकल्प ले। बाल श्रम अभिशाप है बच्चों की मासूमियत के लिए। इस अभिशाप से मुक्ति दिलाने का।

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