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फाइलों में दम तोड़ रहा बेटियों का सम्मान

शासन ने दुष्कर्म और तेजाब हमले की पीड़ितों को सम्मान देने के लिए शुरू की थी रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान योजना

नवनीत गुप्ता उत्तर प्रदेश न्यूज21ऑल इंडिया प्रेस एसोशियेशन(AIPA)

औरैया: दुष्कर्म की शिकार महिलाओं, युवतियों, नाबालिगों के जख्मों पर मरहम तो नहीं लगाया जा सकता लेकिन उनके जीवन को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार ने 2015 में रानी लक्ष्मी बाई महिला सम्मान कोष शुरु किया था। इसके द्वारा दुष्कर्म से पीड़ित महिलाओं को मदद दी जाती है। जिले में महिलाओं की मदद के लिए यह योजना फाइलों में दब कर रह गई है। दुष्कर्म और बालात्कार से पीड़ित बच्चियों की पुकार सुनने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। तीन महीने से कोई बैठक ही नहीं हुई है। सरकार भले दुष्कर्म और पीड़ित महिलाओं को मुख्यधारा में जोडने के लिए रानी लक्ष्मी महिला सम्मान कोष योजना शुरु की थी लेकिन जिले में अब कुल महज 38 महिलाओं को ही लाभ मिल सका है। इस योजना के तहत हिसा की शिकार महिलाओं कों मदद मिलती है। मगर पुलिस की थ्योरी और विभाग कार्रवाई में लेटलतीफी से योजना फाइलों में दम तोड़ रही है। महिला एवं बाल विकास कल्याण विभाग की ओर संचालित रानी लक्ष्मी बाई योजना के तहत कुछ शर्तों के साथ तेजाब हमले, पाक्सो एक्ट, और दहेज हत्या में अगर मृतक के बच्चे नाबालिग हैं तो उनको सहायता राशि दी जाती है। किसके कितने मामले हैं पेंडिगअब तक कुल 346 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है, 194 प्रकरणों में गिरफ्तारी की गई है, नब्बे दिन के अंदर 258 प्रकरणों में चार्जशीट दाखिल की गई है। एफआईआर दर्ज करने के बाद जिला संचालन समिति के निर्णय के लिए लंबित प्रकरणों की संख्या 226 है। जिला अस्पताल संबद्ध कर दिया गया बाबू
प्रोबेशन कार्यालय में जिस बाबू को लक्ष्मी बाई सम्मान का पटल की जिम्मेदारी सौंपी गई, उसको जिलाधिकारी कार्यालय के निर्देश पर उसकी ड्यूटी कार्यालय संयुक्त जिला अस्पताल में लगा दी गई है। इससे पटल का काम प्रभावित है।

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