Top News

1200 साल पुराने जिंजी किले के बारे में रोचक तथ्य, जो कर देंगे आश्चर्यचकित

उत्तर प्रदेश न्यूज21


भारत में ऐसे कई किले हैं जो सदियों से इतिहास की कहानियां बयां कर रहे हैं। उन्हीं में से एक है जिंजी किला, जिसे जिंजी दुर्ग या सेंजी दुर्ग के नाम से भी जाना जाता है। पुडुचेरी में स्थित यह किला दक्षिण भारत के उत्कृष्टतम किलों में से एक है। इस किले का निर्माण नौंवी शताब्दी में संभवत: चोल राजवंशों द्वारा कराया गया था। इस किले की खूबसूरती ये है कि यह सात पहाड़ियों पर निर्मित कराया गया है, जिनमें कृष्णगिरि, चंद्रागिरि और राजगिरि की पहाड़ियां प्रमुख हैं। यह किला इस प्रकार निर्मित है कि छत्रपति शिवाजी ने इसे भारत का सबसे 'अभेद्य दुर्ग' कहा था। वहीं अंग्रेजों ने इसे 'पूरब का ट्रॉय' कहा था।  
ऊंची दीवारों से घिरा हुआ यह किला रणनीतिक रूप से इस प्रकार बनाया गया था कि दुश्मन इस पर आक्रमण करने से पहले कई बार जरूरत सोचते थे। चूंकि यह किला पहाड़ियों पर स्थित है, इसलिए आज भी यहां के राज दरबार तक दो घंटे की चढ़ाई के बाद ही पहुंचा जा सकता है।
 यह किला लगभग 11 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला है, जिसकी दीवारों की लंबाई लगभग 13 किलोमीटर है। इस किले का मुख्य आकर्षण राजगिरि है, जहां एक पिरामिडनुमा शीर्ष से सजी बहुमंजिला कल्याण महल है। इसके अलावा राजगिरि पहाड़ी के निचले हिस्से में महल, अन्नागार और एक हाथी टैंक भी है। 
इस किले पर कई शासकों ने राज किया है। यह किला छत्रपति शिवाजी महाराज से लेकर मुगलों, कर्नाटक के नवाबों, फ्रांसीसियों और अंग्रजों के अधीन रहा है। 17वीं शताब्दी में शिवाजी महाराज के नेतृत्व में मराठों द्वारा इस किले को किसी भी हमलावर सेना से बचाने के लिए पुननिर्मित किया गया था।
 फिलहाल यह किला तमिलनाडु पर्यटन क्षेत्र का एक सर्वाधिक रोचक स्थल है, जहां हर साल हजारों की संख्या में लोग घूमने के लिए आते हैं। चूंकि इस समय भारत समेत दुनियाभर में कोरोना महामारी फैली हुई है, इसलिए इस पर्यटन स्थल को फिलहाल बंद कर दिया गया है। 

Post a Comment

If You have any doubts, Please let me know

أحدث أقدم