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बच्चों की पूरी सुरक्षा के बाद ही स्कूल खोले जाने चाहिए-वीरेंद्र बहादुर सिंह



उत्तर प्रदेश- चीन से पैदा हुई महामारी ने पूरी दुनिया की नींद उड़ा कर मानवजीवन के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। भारत भी इससे बचा नहीं है। देश में कोरोना के मामले इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं कि सुन कर डर लगने लगा है। 20 लाख से अधिक मामले देश में हो गए हैं। 40 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। देश में लगभग सभी राज्यों की स्थिति एक जैसी है। इनमें महानगरों की स्थिति कुछ ज्यादा ही खराब है।

कोविड-19 महामारी हमारे स्वास्थ्य पर सीधा हमला करती है।सोशल डिस्टेसिंग और मास्कमहामारी से बचने के एकमात्र रामबाण इलाज हैं। फिर भी लोगों की लापरवाही ने पूरे देश को चिंता में डाल दिया है। मानवजीवन के अनेक क्षेत्रें पर महामारी का सीधा असर दिखाई दे रहा है। अर्थव्यवस्था और रोजी-रोजगार सब चैपट हो गया है। गरीबों और मेहनत-मजदूरी करने वाले लोगों का जीना मुहाल हो गया है। मध्यमवर्ग भी अनेक समस्याओं से जूझ रहा है।

महामारी से सबसे अधिक प्रभावित शिक्षा का क्षेत्र हुआ है। साढ़े चार, पांच महीने से देश में पढ़ाई-लिखाई पूरी तरह बंद है। स्कूल-कालेज खोलना केंद्र और राज्य सरकार के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। छात्र और उनके माता-पिता भी चिंतित हैं। ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था थोड़ा राहत जरूर दे रही है, पर जहां मोबाइल, इंटरनेट की व्यवस्था नहीं है, उस तरह के ग्रामीण इलाकों में गरीब मां-बाप के बच्चे पढ़ाई-लिखाई से पूरी तरह वंचित हैं। यह भी एक तरह की समस्या ही तो है।

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चे अगर दो घंटे से अधिक फोन का उपोग करते हैं तो उनकी स्मरण शक्ति पर गंभीर असर पड़ता है। ऑनलाइन पढ़ाई से कुछ बच्चों को सिरदर्द की शिकायत होने लगी है। ऐसे बच्चों को डाक्टर ऑनलाइन पढ़ाई

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