उत्तर प्रदेश न्यूज21
औरैया:बचपन से पैरालिसिस के शिकार अनुराग ने अपनी बीमारी की परवाह न करते हुए अपने क्षेत्र के बच्चों को हमेशा आगे बढ़ाने की ठान ली है। ये चाहते हैं कि आज जैसे उनका शरीर एक बड़ी बीमारी से लाचार है और उनके काम में बाधा नहीं बन रहा है उसी प्रकार किसी भी बच्चे की पढ़ाई में गरीबी उसकी रूकावट न बने।
“कुछ परेशानियों से जिन्दगी कभी खत्म नहीं होती” अपने बिछड़े दोस्त के इन शब्दों ने अनुराग की जिंदगी बदल दी। औरैया जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर सहार ब्लाक के देवीदास गाँव में रहने वाले अनुराग सिंह (25वर्ष) का बचपन बहुत ही मुश्किलों भरा रहा, लेकिन अनुराग ने इन मुश्किलों को अपनी जिंदगी में रूकावट नहीं बनने दिया। जन्म के छह महीने बाद अनुराग को पैरालिसिस हो गया था। ये मुश्किलें अनुराग के लिए क्षणिक थी। अपनी बीमारी से लड़कर एलएलबी करने के बाद आज ये अपने दोस्तों के सहयोग से सैकड़ों बच्चों को मुफ्त में पठन सामग्री उपलब्ध कराने के साथ ही योग्य शिक्षकों द्वारा उन्हें नि:शुल्क शिक्षा भी दे रहे हैं।
गल्योसिस बीमारी से पीड़ित रहे अनुराग-
आईसीयू में एक महीने तक एडमिट रहने के बाद अनुराग के घर वालों को ये पता चला कि गल्योसिस नामक बीमारी है। पूरे पांच साल इस बीमारी की पीड़ा से लड़ने के बाद अनुराग जिन्दगी से हार मानने लगे थे। परिवार और दोस्तों के प्रोत्साहन से पढ़ाई लगातार जारी रही। 15 वर्ष की उम्र में ही कम्प्यूटर टीचर के तौर पर अपने कैरियर की शुरुआत की। इस कैरियर में ढाई हजार रुपये मिलने शुरू हुए और अनुराग की पढ़ाई जारी रही। सबकुछ ठीक चलना शुरू ही हुआ था। की कुछ कारणों बस वो अवसाद में चले गए जिसमे निकलने में उनकी मदद उनके सबसे करीबी मित्र सुमित ने की।
सड़क हादसे में हो गई दोस्त की मृत्यु-अनुराग के इन मुश्किल क्षणों में सबसे जिगरी दोस्त सुमित गुप्ता ने उबारने की बहुत कोशिश की। अनुराग की आँखें ये बताते हुए भर जाती हैं कि वर्ष 2014 में एक सड़क हादसे में मेरा दोस्त नहीं रहा मगर उसके कहे शब्द “कुछ परेशानियों से जिन्दगी कभी खत्म नहीं होती” इस वाक्य ने मुझे हिम्मत दी और मैंने “आओ मिलकर करें मदद” नाम की एक संस्था खोली।
नवम्बर- 2018 में हुई ओपन हार्ट सर्जरी-अनुराग जब संस्थान को चलाना शुरू ही किया था तो परिवार में उनके इस फैसले का स्वागत व उनका साथ उनकी मां ने ही किया था परन्तु फरवरी 2017 मेंउनकी माँ कोमा में चली गई और 13 अगस्त 2017 को उनकी असमय मौत हो गई। अनुराग की परेशानी यहां थमी नही थी उन्हें एक गम्भीर दिल की बीमारी का पता उनकी माँ की मौत के कुछ समय बाद चला। और दिल्ली के कई बड़े अस्पताल में इलाज करवाने के बाबजूद उन्हें आराम न मिला जिसके बाद डॉक्टरों ने उनकी जिंदगी बचाने के लिये नवम्बर 2018 में उनकी बेहद जटिल ओपन हार्ट सर्जरी की। उनकी सर्जरी का ज्यादातर खर्च संस्थान में उनके साथी डॉक्टर राजेश अनुरागी व दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर राजकुमार ने उठाया था।गांव की लड़कियां बेलन की बजाय थामती है क्रिकेट बैट-अनुराग ने अपने संस्थान में पढ़ने वाली छात्राओं के लिये स्पोर्ट्स एकेडमी भी खोली है जिसमें लड़कियां क्रिकेट खेलती है अनुराग बताते है कि ये काम उनके लिये आसान नही था उन्होंने इसके लिये अपनी गर्ल्स टीम की मदद ली और लड़कियों के परिजनों को समझाया तब जाकर लड़कियां आज नेट प्रेक्टिस व मैदान पर क्रिकेट खेलती हैं।संस्थान के बच्चे जाते है चिड़ियाघर और पिकनिक पर-संस्थान के बच्चों के मानसिक विकास हेतु अनुराग उन्हें चिड़ियाघर व अन्य जगहों पर लेकर जाते है जिससे गांव के इन बच्चों को नई-नई जानकारियां मिल सके। अनुराग के संस्थान के दो छात्र आस्था व हर्ष कुमार *"नवोदय विद्यालय"* व *"सर्वोदय विद्यालय"* की प्रवेश परीक्षाओं को पास करके संस्थान का नाम रोशन कर चुके है।पांच भाई और दो बहनों में सबसे छोटे अनुराग अपने बारे में बताते हैं, “पांच भाई और दो बहनों में मैं सबसे छोटा हूँ। जन्म के छह महीने बाद ही मुझे पैरालिसिस हो गया था। निरंतर इलाज चला और मै डेढ़ साल की उम्र में ठीक हो गया था। पैरालिसिस ठीक तो हो गया था, लेकिन तीन साल की उम्र से ही मुझे दौरे पड़ने शुरू हो गये। इलाज चलने के साथ ही मेरी पढाई कभी बंद नहीं हुई। वर्ष 2006 में दसवीं परीक्षा पास करने के बाद मानसिक संतुलन पूरी तरह से गड़बड़ा गया।” वो आगे बताते है, “पढ़ाई के साथ-साथ इन बच्चों को समय-समय पर कई तरह की गतिविधियाँ कराते रहते हैं जिनसे ये खुश रहते हैं, इन बच्चों के बीच आकर मै अपनी बीमारी भूल जाता हूँ और खुशी का अनुभव करता हूँ।”
अपनी सैलरी से लगाते हैं पैसा-आओ मिलकर करें मदद” इस संस्था का उद्देश्य गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देना, महिलाएं अपने अधिकार जाने, बेटी बचाओ जैसे तमाम मुद्दे पर कार्य करना है। अनुराग बताते हैं कि हमारे चार मित्र राजेश अनुरागी, यश कुमार,रोहित वर्मा, और भानु प्रताप सिंह पूरी तरह से हमारी इस मुहिम में शामिल हैं। मैं और मेरे सभी मित्र प्राइवेट जॉब करते हैं और उससे जो पैसा कमाते हैं, उससे इस संस्था को चलाया जा रहा है। बच्चे बेझिझक करते हैं सवाल गरीब बच्चों को मुफ्त में मिल रही शिक्षा इस संस्था में अब तक हजारों की संख्या में गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ाया जा चुका है, जिसे आस-पास के साथी मित्र मिलकर पढ़ाते हैं। इनमें रोहित अमित, विकास,अभिषेक, विपिन,अमन,नूरआलम, मु.आसिफ, सागर, अजीत सिंह, पवनेश, विप्लव आदि मुख्य रूप से जुड़े हैं। लड़कियों की एक टीम महिलाओं को उनके मुद्दे पर जागरूक करने का कार्य कर रही हैं, जिसमें अनुराधा, कुमारी विजया, एकता जैसी कई ग्रामीण लड़कियाँ शामिल हैं।अभी कारवां बहुत आगे ले जाना है-अनुराग खुश होकर बताते हैं कि हमारे सभी साथी हमें बहुत सहयोग कर रहें है। ये पैसे के लिए काम नहीं कर रहे, बल्कि समाज के लिए काम कर रहे हैं। अनुराग को पत्रकारिता का बहुत शौक है। वो बहुत सारी कविताएँ और लेख भी लिखते हैं। अनुराग कहते हैं, “आज मैं अपने काम से बहुत खुश हूँ। कोशिश है कि औरैया जिले में बहुत सारा काम करूं। अभी शुरुआत है और ये कारवां बहुत आगे ले जाना है।”गाँव के बच्चे सीखते हैं मुफ्त मे कंप्यूटर-अनुराग ने इसी वर्ष फरवरी में अपनी एकेडमी में एक कंप्यूटर लैब भी खोली है। जिसके माध्यम से वह गांव के युवाओं को कंप्यूटर की निःशुल्क शिक्षा देकर उन्हें स्वाबलम्बी बनाना है।
कोरोना महामारी में 1000 से ज्यादा परिवारों को भेजी मदद-जब माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने लॉकडाउन की घोषणा की। उस वक्त औरैया जनपद के गरीब-बेसहारा लोंगों तक राशन सामग्री पहुंचाने का वीणा अनुराग व उनकी टीम ने उठाया। उनकी टीम द्वारा 1000 से ज्यादा परिवारों को राशन पहुँचाया गया व दिल्ली में फँसे बिहार व उत्तर प्रदेश के कुछ मजदूरों को घर वापसी हेतु आर्थिक सहायता भी भेजी।
बनवाना चाहते हैं बच्चों के लिये स्कूल जिसमें हर बच्चा मुफ्त में शिक्षा पा सके अनुराग अपने संस्थान के माध्यम से एक ऐसा स्कूल बनवाना चाहते है जिसमें हर गरीब बच्चा मुफ्त में शिक्षा पा सके।
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