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जब वित्त मंत्रालय के फर्जी विजिलेंस अफसर मनीष कुमार का असली IPSअफसर आकाश तोमर से हुआ सामना,तो यूँ घुटने टेक दिए अभियुक्त ने

राहुल अगिनहोत्री/उत्तर प्रदेश न्यूज़21/इटावा
आप सभी को बताते चल रहे है  जनपद इटावा के तेजतर्रार,ईमानदार,कर्मठ,देश व प्रदेश के वरिष्ठ जनो द्वारा सम्मानित युवा एसएसपी श्री.आकाश तोमर[IPS]जी के कुशल निर्देशन में अपराध एवं अपराधियो के विरुद्ध चल रहे अभियान के तहत एसओजी टीम इटावा एवं थाना सिविल लाइन की संयुक्त पुलिस टीम द्वारा लोगो को नौकरी आदि का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह के एक फर्जी आईआरएस अधिकारी सहित कुल 5 अभियुक्तो को गिरप्तार किया,यह जानकारी एसएसपी आकाश तोमर ने फोन और दी है,थाना सिविल लाइन पुलिस टीम द्वारा लॉकडाउन के नियमों के अनुपालन हेतु डीएम चैराहे पर संदिग्ध वाहन और व्यक्तियों की चेकिंग की जा रही थी,इसी दौरान मुखबिर द्वारा सूचना मिली कि एक नीली बत्ती लगी इनोवा कार लौहन्ना चौराहे की ओर से इटावा शहर की ओर आ रही है जिसमे लगभग 5 लोग सवार है,उनके द्वारा विगत कुछ समय से आम जनता को नौकरी आदि का झांसा देकर पैसे ठगने का काम करते है,पुलिस ने बिना किसी देरी के मुखबिर की सूचना के आधार पर एसओजी इटावा व थाना सिविल लाइन की संयुक्त टीम द्बारा पुलिस लाइन तिराहे पर संघन चेकिंग की जाने लगी इसी दौरान लौहन्ना चैराहे की ओर से एक नीली बत्ती लगी कार आती हुई दिखाई दी जिसे पुलिस टीम द्वारा टॉर्च की रोशनी दिखाकर रोकने का प्रयास किया गया,जिस पर कार सवार द्वारा गाड़ी रोककर  उतरकर भागने का प्रयास किया गया,जिन्हें पुलिस टीम द्वारा दौडकर व आवश्यक बल प्रयोग कर घेराबंदी करके पकड़ लिया गया,वही पुलिस टीम द्वारा अभियुक्तों से सख्ती से पूछताछ में अभियुक्त मनीष कुमार द्वारा बताया गया कि में विगत दो-तीन वर्ष से लगातार आईआरएस एवं आईपीएस अधिकारी बनकर दिल्ली,नोयडा,गाजियाबाद,इटावा,व प्रदेश के विभिन्न जनपदो में विजिलेंस अधिकारी बनाकर लोगो से ठगी का काम करते थे,अभियुक्त द्वारा बताया गया कि स्वयं ही किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आईजीआरएस शिकायत डालकर स्वयं ही सरकार की ओर से जांच टीम बनकर व्यक्ति को ब्लैकमेल करके रुपये ठगने का काम करते थे,अभियुक्त द्वारा यह भी बताया गया कि वह अपने साथ अपने पत्रकार मित्रों को भी साथ रखते थे जिससे किसी भी व्यक्ति को ब्लैकमेल करके ठगी की जा सके तथा अपना काम कराने के लिये किसी भी अधिकारी पर दबाव बनाया जा सके,पुलिस पूछताछ में यह तथ्य भी सामने आये कि अभियुक्त मनीष बर्खास्त बैंक PO कर्मचारी है,जिसे बैंक द्वारा लोन धोखाधड़ी में बर्खास्त कर दिया गया था,उसके बाद से ही अभियुक्त द्वारा फर्जी आईआरएस अधिकारी बनकर ठगी करता था,अभियुक्त द्वारा स्वयं को 2012बैच का।आईआरएस अधिकारी के तौर पर दिखाने के लिए फर्जी आईडी कार्ड फर्जी बेवसाइट भी बनायी गयी थी।

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