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मजबूरी ने यूं दस्तक दी,* *इंसान बेचारा बदल गया।

उत्तर प्रदेश न्यूज21
*कोरोना वायरस*
*💫💐बेबसी/मजबूरी💐💫*
कोई कहता ज़माना बदल गया,
हर  ढंग   पुराना   बदल   गया।
*मजबूरी   ने   यूं   दस्तक   दी,*
*इंसान   बेचारा   बदल   गया।*

ना देख किसी को हंसता है,
ना कोई  यहां  मुस्कुराता  है।
आदत हो गयी मजबूरी  की,
अब कोई ना शोक मनाता है।
जीवन  की खुशनुमां राहों से,
बेबस होकर के भटक  गया।

*मजबूरी   ने   यूं   दस्तक   दी,*
*इंसान   बेचारा   बदल   गया।*

तन है मिट्टी का क्षणिक ढ़ेर,
जीवन, सांसों का  हेर  फेर।
नश्वरता ,तन की परिभाषा।
ये सोच हुआ बेबस खुद से।
खुद मौत का झूला लटक गया।

*मजबूरी   ने   यूं   दस्तक   दी,*
*इंसान   बेचारा   बदल   गया।*

लहरें सिर अपना पटक रहीं,
तट  पर  सूखापन  छाया है।
सागर इतना गम्भीर हो गया,
नदियों  को  रोना आया  है।
कैसा निष्ठुर मौसम हो गया,
बारिश का रास्ता बदल गया।

*मजबूरी   ने   यूं   दस्तक   दी,*
*इंसान   बेचारा   बदल   गया।*

कलियों की पलकें भींगी हैं,
फूलों  ने   रंग   उड़ाया   है ।
धरती रो रोकर तड़प उठी,
अम्बर  ने  गले  लगाया  है।
हर तितली सिसकी भरती है,
बगिया में मातम फैल गया।

*मजबूरी   ने   यूं   दस्तक   दी,*
*इंसान   बेचारा   बदल   गया।*
   *--उपासना*
     (स०अ०)
     प्रा०वि० पुर्वा हृदय
      सहार(औरैया)

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