*पढ़ने की उम्र में कबाड़ा बीन रहे नौनिहाल*
*बाल श्रम शोषण पर नहीं लगा अंकुश बना मूकदर्शक हुआ तमाशाई*
*बिधूना,औरैया।* बिधूना क्षेत्र में पढ़ने लिखने की उम्र में नौनिहाल कबाड़ा बीनते नजर आ रहे हैं ऐसे में बाल श्रम शोषण पर अंकुश लगाने व सभी बच्चों को स्कूल भेजने के सरकारी दावे धूल चाटते नजर आ रहे हैं। भले ही सरकारों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा भी बाल श्रम शोषण पर अंकुश लगने व सभी नन्हे-मुन्ने बच्चों को स्कूल भेजने के तमाम दावे किए जा रहे हैं लेकिन बिधूना क्षेत्र में यह सरकारी दावे पूरी तरह खोखले साबित होते नजर आ रहे हैं। बिधूना नगर में गुरुवार को सड़कों पर दुकानों के किनारे कबाड़ा बीन रहे कस्बे के ही लगभग 8 सूरत वर्षीय 9 वर्षीय वीरेंद्र व 7 वर्षीय कबीर ने बताया कि उनके मां-बाप के पास घर मकान भी नहीं है और उनके मां-बाप मेहनत मजदूरी करके भरण पोषण करते हैं ऐसे में परिवार का सहयोग करने के लिए वह लोग भी कबाड़ा बीनते हैं। इन बच्चों ने बताया है कि वह आज तक स्कूल नहीं गए हैं और ना ही किसी ने उनसे स्कूल जाने के लिए कहा है हालांकि उनका भी मन पढ़ने के लिए होता है लेकिन मां बाप के कहने पर काम कर रहे हैं। यही नहीं ऐसे तमाम नन्हे मुन्ने बच्चे हैं जो कबाड़ा बीनने के साथ दुकानों सब्जी फल की आढ़तों ईट भट्ठों पर काम करते देखे जाते हैं लेकिन यह सब जानते हुए भी बाल श्रम शोषण पर अंकुश लगाने वाले अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। इसके साथ ही मूकदर्शक व तमाशाई बने हुए हैं।
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