*गेहूँ की फसल को नुकसान पहुंचा रहे आवारा पशु*
*अछल्दा,औरैया।* खेतों में गेहूं की बुवाई हो चुकी है और पौधा बड़ा होने लगा है, लेकिन गांवों में आवारा पशुओं की वजह से गेहूं की फसल पर खतरा बना हुआ है। फसल को नुकसान से बचाने के लिए किसान जतन भी खूब कर रहे हैं, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।यह समस्या विकास खंड क्षेत्र में बनी हुई है। धान कटाई होने पर जैसे ही खेत खाली हुए, तो किसानों ने गेहूं की बुवाई कर दी। जिन खेतों में अगेती बुवाई हुई, उनमें गेहूं का पौधा काफी बढ़ गया है, तो 20 दिसंबर तक बुवाई वाले खेतों में भी पौधा निकलना शुरू हो गया है। इसी बीच किसानों की चिंता आवारा पशुओं ने बढ़ा दी है। आवारा पशु खेतों में घुसकर अभी से गेहूं की फसल को नष्ट कर रहे हैं, जिस कारण किसानों को काफी परेशान होना पड़ रहा है।
खेतों की तारबंदी पर 50 हजार रुपये प्रति एकड़ का खर्च आ रहा है। फसल को बर्बाद होने से बचाने के लिए किसान अपने खेतों की तारबंदी भी कर रहे हैं। खेत के चारों तरफ पिलर गाड़कर तार की फेंसिंग की जा रही हैं, ताकि फसल में आवारा पशु न घुसने पाएं। इस कार्य पर किसानों को प्रति एकड़ 50 हजार रुपये तक का खर्चा उठाना पड़ रहा है।रात में पहरा देने को मजबूर किसान अछल्दा विकासखंड क्षेत्र के बघुआ,मोहम्दाबाद, चिकूनी, बघुईपुर, घसारा, इटैली, नन्दपुर , ग्वारी, गुनौली , बंशी, सलेमपुर, वीरपुर आदि पंचायतों के किसानों का कहना है कि पहरा देने के बावजूद आवारा पशु खेतों में घुसकर फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सरकार को इस दिशा में कदम उठाने चाहिए।क्षेत्र में नील गाय और आवारा पशुओं ने किसानों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है।खेतों में गेहूं, सरसों आदि की फसल बो रखी है। आवारा जानवर फसल को नुकसान कर रहे हैं। रात में पहरा भी देना पड़ रहा है। यदि गेहूं, सरसों आदि की थोड़ी बहुत फसल होती है, तो आवारा पशु नुकसान पहुंचा देते हैं।
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