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धुएं के छल्ले में उड़ा रहे जिंदगी की खुशहाली

*धुएं के छल्ले में उड़ा रहे जिंदगी की खुशहाली*

*अछल्दा,औरैया।* अनजाने में लोग अपनी जिंदगी धुंए में उड़ा रहे हैं। आज आवश्यकता है जागरूकता की। कैंसर जैसी बीमारियों को जड़ से मिटाने के लिए धूमपान का त्याग जरूरी है।
यानी वे लोग जो धूम्रपान कर अपनी जिंदगी को बेवजह मौत के मुंह में धकेल रहे हैं। सिगरेट ,बीड़ी ,शराब पीना धूमपान या नशा करना आत्महत्या करने के ही बराबर है। पहले सिगरेट के डिब्बी पर लिखी चेतावनी पर गौर फरमाया जाए तो उस पर लिखा होता था कि सिगरेट पीना आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। इस चेतावनी में बदलाव किए गए और सिगरेट की डिब्बी एवं गुटखों पर लिखा जाने लगा कि सिगरेट पीना आपकी सेहत के लिए हानिकारक है। सिगरेट का धुआं फेफड़ों का कैंसर, हृदय रोग, ब्रॉनकाइटस जैसी बीमारिया देता है। इस चेतावनी के बाद भी धूमपान को दिन-प्रतिदिन बढ़ावा मिलता गया और अब चेतावनी में बदलाव करते हुए खरे शब्दों में लिखा आता है वार्निग-स्मोकिंग किल्स। धूमपान का सेवन प्राणघातक है।
समझदार व्यक्ति को इशारा ही काफी है लेकिन यहां तो केवल इशारा ही नहीं बल्कि स्पष्ट शब्दों में पूरी चेतावनी दी जा रही है। उसके बावजूद भी शर्म की बात यह है कि धूमपान से हो रही मौतों की गिनती थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं। डब्ल्यूएचओ के आंकड़े साफ बताते हैं कि करीब 10 फीसद मौतें धूमपान के कारण होती हैं। यह समाज में फैली एक ऐसी विकृति है जो लगभग घर-घर पहुंच चुकी है। जिसका शिकार बुजुर्ग ही नहीं युवा वर्ग, बच्चे तथा महिलाएं भी हैं। प्राय: बचपन से धूमपान को सुपारी के रूप में प्रारंभ किया जाता है और यह किशोरावस्था में आते-आते गुटखा, तंबाकू, सिगरेट आदि के आदी हो जाते हैं
 युवाओं में सिगरेट का शौक बढ़ता ही जा रहा है। पान-सिगरेट की दुकानों में युवा परिजनों से चोरी छिपे सिगरेट पीते हैं। दिन प्रतिदिन युवाओं में यह शौक बढ़ रहा है और बेलगाम होते जा रहे हैं। यही स्थिति रही तो धूमपान से मरने वालों की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ती ही जाएगी।

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