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तीसरे दिन मां चंद्रघंटा व मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना के लिए उमड़े श्रद्धालु भक्तगण

*तीसरे दिन मां चंद्रघंटा व मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना के लिए उमड़े श्रद्धालु भक्तगण* 

*बीहडांचल में स्थित मां मंगलाकाली मंदिर पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब*

*औरैया।* शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर तृतीय दिन शनिवार को तृतिया व चतुर्थी तिथि होने के कारण मां दुर्गा की तृतीय व चतुर्थ स्वरूप मां चंद्रघंटा व मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना के लिए जिले में विभिन्न देवी मंदिरों व घरों पर श्रद्धालु भक्तगणों ने उपरोक्त दोनों देवियों की स्तुति की। वही औरैया के दुर्गम बीहडांचल कालिंद्री तट पर स्थित मां मंगलाकाली मंदिर पर श्रद्धालु भक्तगणों का जनसैलाब उमड़ा। मां मंगलाकाली मंदिर अनेक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। उपरोक्त मंदिर पर कुख्यात दस्यु सम्राट घंटा व झंडा चढ़ाने आते थे। सिद्धपीठ मां मंगलाकाली के मंदिर में दर्शन कर दस्युगण घटनाओं को अंजाम देते रहे हैं।
      औरैया के दक्षिणी ओर करीब 4 किलोमीटर की दूरी पर कालिंद्री तट शेरगढ़ घाट के समीप दुर्गम बीहड़ में मां मंगलाकाली का मंदिर स्थित है। इस मंदिर से अनेकों मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। जानकार लोग बताते हैं कि सन् 1857 में आजादी की पहली लड़ाई के दौरान मां मंगलाकाली यहां स्वयं प्रकट हुई थी। जंगे आजादी में ब्रिटिश फौज ने तोपों से देवकली गांव बिस्मार कर दिया था, लेकिन देवकली की एक ईट तक नहीं टूटी। तभी से अंतर्जनपदीय लोगों का मां मंगलाकाली मंदिर आस्था का केंद्र बिंदु बना हुआ है। कई दशक पूर्व उपरोक्त मंगलाकाली मंदिर पर कुख्यात दस्यु देवी मंदिर पर पूजा अर्चना करने के साथ ही घंटा व झंडा चढ़ाने आया करते थे। जानकार लोगों का कहना है कि उपरोक्त देवी मंदिर पर कुख्यात दस्यु सम्राट निर्भय गुर्जर , मलखान सिंह , माधव सिंह , फूलन देवी , राम आसरे फक्कड़ के अलावा अन्य दस्यु सम्राट अर्चन वंदन के साथ अपना माथा टेकने आते थे। मंदिर की खासियत यह है कि यह दुर्गम बीहड़ांचल में स्थित होने के चलते यहां की प्राकृतिक अलौकिक छटा बहुत ही स्वाभिनी एवं मनोरम दृश्य प्रकट करती है। नवदुर्गा के तीसरे दिन मां मंगलाकाली के दर्शन के लिए श्रद्धालु भक्तगणों का देर शाम तक आवागमन रहा। पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालु भक्तगणों की कतार लगी रही। आपको बताते चलें कि जनपद के विभिन्न देवी मंदिरों पर कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा का भी शुभारंभ हो गया है। इसके अलावा शाम के समय देवी माता की आरती के साथ ही भजन कीर्तन भी हो रहे हैं।

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