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*प्रख्यात रचनाकार आचार्य देवेन्द्र देव के रचना संसार पर शोध का शुभारंभ*


■ *मध्यप्रदेश के जीवाजी विश्वविद्यालय  ने शोधार्थी राकेश ओझा को दी शोध की मंजूरी*
■ *आचार्य देवेंद्र देव जी के रचना संसार पर शोध कार्य हिंदी साहित्य जगत के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण--ऋषि कुमार शर्मा साहित्यकार*
घनश्याम सिंह
बरेली
हिन्दी भाषा में सर्वाधिक 17 महाकाव्यों की रचना करके 'गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स'' में नाम दर्ज कराने वाले पूरनपुर में जन्मे, बरेली के निवासी वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य देवेन्द्र देव के साहित्य पर शोध शुरू हो गया है |
            जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर में गुना कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर सतीश चन्द्र चतुर्वेदी 'शाकुन्तल'  के निर्देशन में शोधार्थी राकेश ओझा आचार्य देवेन्द्र देव के साहित्य पर शोध करेंगे | 'आचार्य देवेन्द्र देव का रचना संसार व राष्ट्रीय चेतना' विषय पर शोध करने की मंजूरी विश्वविद्यालय ने दे दी हैं | यह साहित्य जगत के लिए गर्व और गौरव की बात है।आचार्य जी के साहित्य को यह सम्मान माँ शारदे की कृपा और उनकी साधना का परिणाम है| आचार्य देवेन्द्र को स्थानीय कवियों6 एवं साहित्यकारों के अतिरिक्त पूरे साहित्य-जगत से बधाई सन्देश प्राप्त हो रहे हैं | आचार्य देवेन्द्र देव लगभग 50 वर्षों से कविता की साधना , राष्ट्रभाषा के प्रचार –प्रसार व् संस्कृति के उत्थान के निमित्त राष्ट्र गौरव की कविताएँ लिखकर अपने देश का नाम भारत की सीमाओं से पार पहुचानें का गौरव प्राप्त कर चुकें है। उत्तरभारत के सुप्रसिद्ध कवि राम भरोसे पांडे पंकज एवं राजेंद्र भानु के संपर्क में आने पर देवेन्द्र जी को संरक्षण के साथ ही काव्य साधना की प्रेरणा मिली | 'अखंड ज्योति' , 'युग निर्माण योजना' व बरेली , लखनऊ , दिल्ली तथा पूरे देश से प्रकाशित हजारों पत्र+पत्रिकाओं में उनकी रचना प्रकाशित हुई और कैसेट में उनके गीत संगीत के साथ संग्रहीत,प्रचारित,प्रसारित किये गए | देशगान के कैसेट अमेरिका तक पहुँचे जिस पर अमेरिका की एक संस्था ए.बी.आई. ने उन्हें 'मैंन ऑफ़ द इयर-1998' से सम्मानित किया | आचार्य जी साहित्य क्षेत्र में राष्ट्रीय विचारधारा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का उद्घोषक के रूप में जाने जाते हैं।इसके अतिरिक्त अखिल भारतीय स्तर पर आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी , डॉ.विद्यानिवास मिश्र , महादेवी वर्मा , श्याम नारायण पाण्डेय जैसी साहित्यिक विभूतियों की अध्यक्षता में काव्यपाठ करने का उन्हें गौरव प्राप्त है | आचार्य देवेन्द्र देव भाषा-साहित्य के समर्पित वैश्विक संगठन हिन्दी साहित्य भारती में केंद्रीय उपाध्यक्ष एवं संस्कार भारती में अखिल भारतीय सह संयोजक-साहित्य के दायित्व के रूप में सेवा साधनारत हैं, आचार्य नरेंद्र देव जी के रचना संग्रह पर शोध कार्य किए जाने की खुशखबरी मिलने पर प्रख्यात युवा साहित्यकार ऋषि कुमार शर्मा ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय साहित्य जगत के लिए यह अत्यंत गौरव की बात है उन्होंने बताया कि आचार्य नरेंद्र जी ने साहित्य के माध्यम से समाज को जो मार्गदर्शन दिया वह अत्यंत चिर
 स्मरणीय है |
फ़ोटो- आचार्य नरेंद्र देव

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