आखिर खाकी क्यों खाकी पर मेहरबान दोस्ती के चलते नही करते है चालान
कानपुर। जहां एक तरफ सूबे की सरकार कानपुर में नई कमिश्नरी नीति लागू होने के बाद जनता में अपराध आए दिन पुलिस द्वारा आम जनमानस उत्पीड़न की शासन स्तर पर शिकायतें आ रही थी। जिसको देखते शहर में कानून व्यवस्था ध्वस्त होती नजर आ रही थीः इन सब पहलुओं को देखते सरकार ने कानपुर में कमिश्नर नीति लागू की जिसके परिणाम स्वरूप आम जनमानस में भी एक पुलिस द्वारा अच्छी और साफ कानून व्यवस्था की जनता के बीच में आस जगी लेकिन परिणाम उसके उलट ही नजर आ रहे हैं ।उच्च अधिकारियों के आदेश पर दिन रात असमय चेकिंग का आदेश है और जो भी ट्रैफिक नियम का उल्लंघन करता पाए उसके खिलाफ पुलिस द्वारा वाहन स्वामी के ऊपर सख्त कार्रवाई की जाए और ऐसा पुलिसकर्मी अपने अधिकारी के दिए गए आदेश का बखूबी पालन कर भी रहे हैं चाहे वहां एक समाज सेवा संस्था हो या एक पत्रकार या समाज से जुड़ा हुआ कोई भी व्यक्ति पुलिस को सिर्फ चालान से मतलब है और अपने अधिकारी के दिए गए पालन को कराना है। क्या सिर्फ ऐसे आदेश और कानून ट्रैफिक नियम सिर्फ आम जनता तक सीमित रह गए हैं। क्या ऐसे ट्रैफिक पुलिस वालों को नियम तोड़ते अपने ही विभाग के पुलिसकर्मी नहीं दिखाई देते हैं ।जो कि कोविड- गाइड लाइन का पूर्ण रूप से खुला उल्लंघन कर रहे हैं और तीन सवारी बैठा कर महिला कांस्टेबल फर्राटा भरते हुए आपको चित्र में दिखाई दे रही हैं एक राहगीर के रोकने पर उसने पूछ लिया कि मैडम आप तीन सवारी बैठा कर ले जा रही हैं ।आप ट्रैफिक नियम का उल्लंघन नहीं कर रही हैं। तो उन्होंने जवाब दिया अपना काम करो हमको मत पाठ पढ़ाओ क्या होता है। कानून जाओ तुम मेरी शिकायत कर दो मैं नहीं मानती नियम कानून ज्यादा बोलोगे तो अभी सारे कानून तुमको यही सिखा दूंगी ऐसा कहते हुए महिला आगे स्कूटी लेकर चलती बनी क्या नंबर प्लेट के आधार पर पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नहीं बनती या सिर्फ सारे नियम कानून आम जनता के ऊपर ही लागू होते हैं इसकी जवाबदेही प्रशासन में बैठे उच्च अधिकारियों की है देखना यह है कि एसपी ट्रैफिक इस नंबर प्लेट के आधार पर बिगड़ैल महिला पुलिसकर्मी पर क्या कार्रवाई करते हैं।।
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