घनश्याम सिंह
औरैया
जनपद स्थित कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा की गृह वैज्ञानिक डॉ रश्मि यादव ने किसानों को अनाजों के सुरक्षित भंडारण के उपाय बताए।।
कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा औरैया की गृह वैज्ञानिक डॉ रश्मि यादव ने बताया कि प्रायः अनाज की कटाई के साथ ही उसके उचित भंडारण की तैयारी शुरू हो जाती है, किसान बाजरा गेहूं मक्का ज्वार आदि के सीटें और बालियां जिस बोरे में भरकर रखने हो उस मेरे को पहले से ही 1% मेलाथियान के घोल में 10 मिनट भिगोकर अच्छी तरह सुखाएं तेज धूप में 5 से 6 घंटे सुख आने पर कीड़ों का प्रकोप बहुत कम हो जाता है काटे हुए अनाज को सीधे जमीन पर ना रखें इससे कीड़े और जमीन दोनों से अनाज प्रभावित होता है अनाज लाने वाली गाड़ी ट्रैक्टर ट्रॉली को अनाज रखने से पहले धोकर सुखा लेना चाहिए अनाज खेत से लाकर घर में कड़ी धूप में सुखाना चाहिए सुखाते समय प्लास्टिक का मोम जमा काम में लें जो कि भली-भांति कीटनाशक से उपचारित होना चाहिए
*अनाज की सफाई*
किसान भंडारण से पहले अनाज को साफ करें उसमें से भूसी, काट, कटा-फटा अनाज, संक्रमित अनाज, कंकड़ आदि निकालने को करीब 20 से 30 दिन सुखाना चाहिए सूखने की पहचान होती है कि यदि दाने को दांत के बीच में रखकर काटा जाए तो कट की आवाज आए सूखे हुए अनाज को शाम के समय कोठी में ना भरे सूखे अनाज को पूरी रात खुली हवा में ठंडा होने दें और उसे कोठी में भरे इस प्रकार सूखे अनाज में 3 से 4% नमी रह जाती है,
*कोठी भंडार ग्रह की सफाई*
किसानों को भंडार ग्रह में छत , फर्श खिड़कियां एवं दरवाजे प्रमुख होते हैं फर्श में कहीं पर भी दरारे वह तो उनमें सीमेंट भर देना चाहिए जहां पर फर्ज और दीवारें मिलते हैं उन जगह पर भी अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए दीवारें यदि सीमेंट की हो तो उत्तम होगा दीवारों में दरारें पपड़ी आदि नहीं होनी चाहिएभंडारण के 10 दिन पूर्व कमरे में जीरो पॉइंट 5% मेलाथियान का घोल बनाकर 3 लीटर प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से गोदाम में छिड़काव करना चाहिए इसके बाद गोदाम को अच्छी तरह सूखने देना चाहिए दरवाजों के नीचे की सतह लोहिया एलमुनियम की पत्तियां लगा देनी चाहिए ताकि चूहों से बचाव हो सके जहां तक संभव हो एक पल्ले का दरवाजा रखें खिड़कियां बाहर खुलने वाली हो और ऊंचाई पर हो खिड़कियों पर महीन जाली होनी चाहिए।
*बोरी की सफाई*
किसान बंधु अनाज को जूट के बोरों या कट्टों में भी संग्रह कर सकते हैं जहां तक संभव हो नए गौरव का प्रयोग करें अगर बोरे पुराने हैं तो उन्हें 1% मेलाथियान के घोल में आधे घंटे विवाह और कड़ी धूप में दो-तीन दिन तक उलट-पुलट कर सुखा लें यह काम गर्मी के मौसम में करने तो अच्छा रहेगा यदि पूरी कहीं से फटे हैं तो उन्हें सिले, अनाज भरने के बाद घोड़े का मुंह अच्छी तरह से सिल दें।
*चूहा नियंत्रण*
चूहा नियंत्रण पूरे घर व आसपास के क्षेत्रों में मई व जून माह में करना चाहिए इस समय खेत में अन्य कोई खाद्य नहीं होता है इसलिए चूहा 20 जून तक आसानी से खा लेता है
चूहों से बचाने के लिए एक ग्राम जिंक फॉस्फाईड और उन्नीस ग्राम सत्तू या आटा में थोड़ा सरसों तेल मिलाकर एवं लगभग 10 ग्राम की गोली बनाकर चूहों के आने-जाने के रास्ते पर गिनती में रख देना चाहिए। खुले हुए अनाज पर कीटनाशी नहीं रखना चाहिए, चूहा शंकालु प्रवृत्ति का होता है। इसलिए बदल-बदल कर विषाक्त चारा, चूहे-दानी एवं टिकिया को रखना चाहिए। दवा अनाज में देने के बाद हाथ साबुन से अच्छी तरह धो लेना चाहिए।
*कीट नियंत्रण*
कीट नियंत्रण दो स्तर पर किया जाता है बचाव के लिए और कीटों का प्रकोप होने के बाद बचाव के नियंत्रण की मुख्य आवश्यकता है
• ईटीवी एम्पुल 30 मिली प्रति मेट्रिक टन अनाज के लिए
• सल्फास एल्यूमिनियम फास्फाइड की 3 ग्राम की एक गोली प्रति मेट्रिक टन अनाज के लिए डाले या 7 गोली 2 ग्राम प्रति 22 घन मीटर स्थान की दर से कमरे को ध्रूमर करने के लिए डालें
• कीटों का आक्रमण कर देने के बाद तीन मिली कि एक ईटीवी एम्पुल प्रति क्विंटल अनाज की दर से कोठी में डालें ईटीवी को कभी खुले में ना डालें यह जानलेवा हो सकता है
*भंडारण*
अनाज से भरे बोरे फर्श पर सीधे ना रखें पहले कोई लकड़ी के पट्टे इस प्रकार रखें कि थोड़ी लकड़ी बाहर की तरफ निकली रहे बोरों को दीवार से एक से डेढ़ फीट दूर रखें, बोरों को एक ही दिशा में ना रखें एक के ऊपर एक रखने के लिए एक बोरा लंबवत रखें और दूसरा बोरा अर्धव्रत रखें अर्थात प्लस का निशान बनाते हुए एक के ऊपर दूसरा रखें इससे बोरों के बीच में हवा आराम से जाएगी ज्यादा ऊंची बोरियां ना लगाएं छत से 2 फीट नीचे बोरियां समाप्त कर दें यदि कोठी में अनाज भर रहे हैं तो उपचारित कोठी में अनाज भरकर ढक्कन बंद करके वायु रोधक लेप लगा दें, अनाज जिस कमरे में रखा हो उसमें घरेलू सामान रखना उठना सोना खाना आदि ना करें इस प्रकार वैज्ञानिक विधि से भंडारण करने पर अन्य सुरक्षा से उपज का पूरा लाभ मिलेगा किसी भी प्रकार के बिष का उपयोग अत्यंत सावधानी से और विशेष देखरेख में करना चाहिए बिष के पैकेट पर लिखे निर्देशों का भली-भांति पालन करें
*परंपरागत तकनीकी ज्ञान*
अनाजों व दालों का भंडारण कुछ पारंपरिक अन्न भंडारण के तरीके जैसे आनाजों व दालों के कड़वा तेल लगाना, राख मिलाना, नीम, लहसुन व करंज के पत्ते कोठी में बिछाना, सूखे हुए लहसुन के डंठल रखना आदि। अनुसंधानों द्वारा यह पाया गया कि परंपरागत तरीके से आनाज व दालों में 10-20 प्रतिशत तक राख मिलाने से वो ख़राब नहीं होते पर आवश्यक है कि राख को छानकर व सुखा कर ही डाला जाय। राख की रगड़ खाकर कीड़े मर जाते और दानों के बीच की जगह जहां हवा हो सकती है, वहां राख आ जाने से हवा नहीं रहती। इस प्रकार राख मिलाना लाभप्रद होता है।
फ़ोटो :जानकारी देतीं कृषि वैज्ञानिक
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