उत्तर प्रदेश न्यूज21
इटावा:महिलाओं और किशोरियों को माहवारी के दौरान कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है । उनको इस तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े, इसलिए हर वर्ष 28 मई को विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है, ताकि उन्हें झिझक छोड़ने और इस बारे में खुलकर बात रखने का मौका मिल सके |
जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक व स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ अशोक जाटव ने बताया कि इस दिवस का उद्देश्य समाज में फैली मासिक धर्म संबंधी गलत अवधारणाओं को दूर करना और महिलाओं और किशोरियों को माहवारी प्रबंधन संबंधी सही जानकारी देना है। 28 मई की तारीख निर्धारित करने के पीछे मकसद है कि मई वर्ष का पांचवां महीना होता है। यह अमूमन प्रत्येक 28 दिनों के पश्चात होने वाले स्त्री के पांच दिनों के मासिक चक्र का परिचायक है।
राष्ट्रीय किशोरी स्वास्थ्य कार्यक्रम परामर्शदाता हेमलता शुक्ला बताती हैं कि मासिक धर्म के बारे में बताने वाली सबसे अच्छी जगह स्कूल हैं। यहां इस विषय को यौन शिक्षा और स्वच्छता से जोड़कर चर्चा की जा सकती है। वह कहती हैं कि घर में बच्चियों की मां भी इस बारे में अपनी सोच बदलें। इस बारे में अपनी बेटियों को ठीक से बताएं, ताकि उनकी बेटी को किसी के सामने शर्मिंदा न होना पड़े। उन्होंने बताया समय-समय पर हम लोग गर्ल्स इंटर कॉलेज में जाकर लड़कियों की काउंसलिंग करते हैं और मासिक धर्म व स्वच्छता के बारे मे बच्चियों को जागरुक करते हैं।
जिला सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक प्रभात बाजपेयी का कहना है मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन हमारे लिए महत्वपूर्ण है। लड़कियों को एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए माहवारी को एक प्राकृतिक प्रकिया मानना चाहिए। इसी वजह से मासिक धर्म स्वछता प्रभंदन सरकार के राष्ट्रीय किशोर स्वस्थ कार्यक्रम का हिस्सा है।
क्या है माहवारी
माहवारी नौ से 13 वर्ष की लड़कियों के शरीर में होने वाली एक सामान्य हार्मोनल प्रक्रिया है। इसकेे फलस्वरूप शरीर में महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं। यह प्राकृतिक प्रक्रिया सभी लड़कियों में किशोरावस्था के अंतिम चरण से शुरू होकर (रजस्वला) उनके संपूर्ण प्रजनन काल (रजोनिवृत्ति पूर्व) तक जारी रहती है। आज भी बहुत सी किशोरियां मासिक धर्म के कारण स्कूल नहीं जाती हैं। महिलाओं को आज भी इस मुद्दे पर बात करने में झिझक होती है। आधे से ज्यादा लोगों को लगता है कि मासिक धर्म अपराध है।
इन बातों का रखें ख्याल
- घर में रखे पुराने गंदे कपड़े का प्रयोग नही करें। इससे संक्रमण का खतरा रहता है।
- छह घंटे के अंतराल पर सैनिटरी नैपकिन बदलना चाहिए।
- समय-समय पर अपने प्राइवेट पार्ट की सफाई करती रहें।
- पीरियड्स के समय कई बार शरीर में दर्द होता है। इसलिए गर्म पानी से नहाएं।
-अपने बिस्तर की सफाई का ध्यान रखना चाहिए। समय-समय पर बेडशीट बदलती रहें।
- अगर यात्रा पर हैं और शौचालय जाना हो तो सफाई वाली जगह पर जाएं।
- खान-पान का रखें ख्याल। सुपाच्य आहार का सेवन करें।
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