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त्रिस्तरीय चुनाव के बदल गए दावेदारों के समीकरण,धरे रहे गये वादे और घोषणा पत्र

उत्तर प्रदेश न्यूज21संवाददाता

लखनऊ:त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में हाईकोर्ट के आरक्षण बदलने के फैसले ने गांव-गांव चुनाव की सरगर्मी बदल के रख दी है। चुनाव की तैयारियों में जुटे सभी प्रत्याशियों के समीकरण पलट गए हैं। सुबह, दोपहर, शाम और देर रात तक जारी जनसंपर्क थम गया है। दावेदार के घर और गांव की गलियों में सन्नाटा सा पसर गया है। प्रत्याशियों के आंकड़े बदलने लगे हैं। गली-मोहल्ले में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि आखिर आरक्षण के बाद कौन प्रत्याशी दावेदारी पेश करेगा।  वहीं, पंचायत राज विभाग के अनुसार एक सीट का आरक्षण बदलता है तो छह सीटों पर असर पड़ता है।बता दें कि पंचायत चुनाव वर्ष 2015 को मूल वर्ष मानते हुए हाईकोर्ट ने सीटों पर आरक्षण लागू करने का दिया आदेश। इसके पूर्व राज्य सरकार ने स्वयं कहा कि वह वर्ष 2015 को मूल वर्ष मानते हुए आरक्षण व्यवस्था लागू करने के लिए तैयार है। इस पर न्यायमूर्ति रितुराज अवस्थी व न्यायमूर्ति मनीष माथुर की खंडपीठ ने 25 मई तक त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संपन्न कराने निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद गांव देहात का माहौल बदल गया है। चुनाव की तैयारियों में जुटे प्रत्याशियों की रफ्तार थम गई है। जिला पंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख, बीडीसी, प्रधानी की दावेदारी करने वाले प्रत्याशी और उनके समर्थकों का जोश भी ठंडे वस्ते में चला गया है। सभी की नजरें शासन की गाइड लाइन की प्रतीक्षा में है। उनका कहना हैं कि साल 2015 को मूल वर्ष मानते हुए सीटों पर आरक्षण लागू हुआ तो बड़ा उलट-फेर देखने को मिलेगा।

लाखों हो गए खर्च, बैनर पोस्टर भी लग गए 
देहात में त्रिस्तरीय चुनाव का बिगुल फुकते ही प्रत्याशियों ने दिल खोल दिया था। अपने-अपने समर्थकों और लोगों को मनाने के लिए सुबह से शाम तक ऐडी-चोटी का दमखम लगाया जा रहा था। जिला पंचायत सदस्य, बीडीसी, प्रधानी के दावेदारों ने बैनर-पोस्टर लगवा दिए। अपने-अपने समीकरण बनाने के लिए लोगों से समर्थन मांगने में जुटे थे। दर्जनों गांव में चुनाव के प्रत्याशियों के लाखों रुपये खर्च हो गए। अब ऐसे में उन सभी प्रत्याशियों के चेहरे पर मायूसी है। घरों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। आरक्षण के बाद सीट क्या होगी। उन्हें चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा या नहीं। ये भय उन्हें अंदर ही अंदर खाए जा रहा है। 

धरे रह गए वादे, घोषणा पत्र भी बंटवाए 

गांव-गांव प्रत्याशी सुबह-शाम जनता के बीच जा रहे थे। उन्हें अपना एजेंडा समझाने के लिए तरह-तरह के प्रयासों में जुटे हुए थे। गांव के समग्र विकास के लिए प्रत्याशियों की अलग-अलग सोच थी। सैकड़ों प्रत्याशियों ने अपने-अपने घोषणा पत्र भी बंटवा दिए थे। रुठे लोगों को मनाने की कवायद हो रहीं थीं। इन सब के बीच आरक्षण ने सभी को थाम दिया है। सोमवार का दिन प्रत्याशियों के लिए तनाव भरा रहा। सभी प्रत्याशी आरक्षण के बाद सीट की स्थिति क्या होगी। बीसी, एसी या सामान्य रहेगी। इसकी जानकारी में लगे रहे।

दो साल से तैयारियों में लगे प्रत्याशियों के खिले चेहरे 

त्रिस्तरीय चुनाव की दो-दो साल पहले से तैयारियों में जुटे प्रत्याशियों की उम्मीदों पर बीते आरक्षण प्रक्रिया ने पानी फेर दिया था। जिलेभर की सैकड़ों ग्राम पंचायत, दर्जनों जिला पंचायत सीटों पर प्रत्याशियों ने आपत्ति लगाई थीं। ये वो प्रत्याशी थे जो वर्षों से चुनाव की तैयारियों में लगे हुए थे। मगर, आरक्षण के कारण उनकी सीट बदल गई और उनका चुनावी रथ थम गया। मगर, जैसे ही हाईकोर्ट का फैसला आया है। उन सभी प्रत्याशियों के चेहरे पर खुशी लौट आई है। उनका कहना हैं कि उनके सालों की मेहनत जाया नहीं गई है।

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