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विश्व किडनी दिवस (11 मार्च) पर विशेष संतुलित, दिनचर्या अपनायें - गुर्दे की बीमारी से निजात पायें - सीएमओ

उत्तर प्रदेश न्यूज21संवाददाता
औरैया:किडनी की बीमारी कहीं महामारी न बन जाए इसलिए विश्व किडनी दिवस की शुरुआत की गई है। मार्च के  दूसरे बृहस्पतिवार को विश्व गुर्दा दिवस मनाया जाता है। इस बार यह 11 मार्च को है। निसंदेह इसका मकसद लोगों को शरीर के इस महत्वपूर्ण अंग के प्रति सचेत और जागरूक करना ही है। मगर आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और खानपान के असंतुलन से जाने-अंजाने इस अंग को बीमारियों ने घेर लिया है। यहीं से दूसरे रोग भी पनप रहे हैं। यदि इसान संतुलित दिनचर्या अपनाए तो गुर्दे (किडनी) की बीमारियों से बचा जा सकता है। यह कहना है मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ अर्चना श्रीवास्तव का। 

मुख्य चिकित्साधिकारी बताती हैं कि इसकी जानकारी शायद हर किसी को है कि मूल रूप से गुर्दे हमारे शरीर में उत्पन्न हुए जहर को बाहर निकालकर खून की सफाई का काम करते हैं । आज जबकि रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर और शुगर  की बीमारी बढ़ रही है तो उससे गुर्दो के लिए भी परेशानी बढ़ गई है। दरअसल गुर्दे हमारे शरीर में फिल्टर का काम करते हैं । इससे शरीर में पानी व नमक की मात्रा नियंत्रित रहती है। गुर्दे फिल्टर के अलावा खून की कमी को भी दूर करते हैं  और हड्डियों को मजबूत रखते हैं । यदि गुर्दो में दिक्कत होती है तो फिर शरीर के दूसरे अंग भी ठीक तरह से काम नहीं करते हैं । गुर्दे की बीमारी के लक्षण
1. पेशाब में खून आना
2. पेशाब में जलन होना और बार-बार आना
3. पैरों व आँखों  में सूजन आना
4. शीघ्र थकान महसूस होना
5. ब्लड प्रेशर अनियंत्रित होना
6. पेशाब की मात्रा में कमी होना
इस तरह हो सकती है जाँच 
गैर संचारी रोगों के नोडल अधिकारी डॉ शिशिर पुरी का कहना है कि गुर्दे की बीमारी का शीघ्र पता चलने पर  पूर्ण इलाज संभव है और बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि ब्लड प्रेशर व शुगर  की नियमित जाँच  कराई जाए। खून की मात्रा और प्रोटीन की जाँच  के अलावा खून में यूरिया, किडनी की पथरी, रुकावट, गदूद व कैंसर की बीमारी की भी नियमित जांच  कराएं। साथ ही पेशाब की मात्रा व धार की भी जाँच  जरूरी है।
ऐसे बचा जा सकता है किडनी की बीमारी से
1. नियमित व्यायाम करें 
2. रोजाना तीन से चार लीटर पानी पीएं
3. धूम्रपान, शराब के सेवन और फास्ट फूड से बचें
4. खाने में नमक की मात्रा कम रखें
5. दर्द की गोलियों का अनावश्यक सेवन न करें 
6. ब्लड प्रेशर व  शुगर की नियमित जाँच  कराएं
7. 35 वर्ष की उम्र के बाद खून व पेशाब की जाँच  अवश्य कराएं

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