उत्तर प्रदेश न्यूज21संवाददाता कानपुर देहात रसूलाबाद
जनकल्याण की रखते थे भावना
कानपुर देहात:ब्रह्मा जी के मानस पुत्र श्री देवर्ष नारद जी को भला कौन नहीं जानता जिन्होंने पूरे लोकों में भ्रमण कर दैत्य दानव देवताओं को खबर बता करते थे व एक दूसरे के शुभ चिंतक भी थे कुटिया बनाने का महत्व
नारद जी के विषय मे बताया जाता था कि अधिकतर भगवत भजन में मस्त रहते थे एक बार राजा दक्ष ने नारद को श्राप दिया था कि आप दो घड़ी से अधिक एक जगह कभी नहीं ठहर पाओगे जिसके चलते वो रुक नहीं पाते थे तब कानपुर देहात के तहसील रसूलाबाद में लगने वाला गाँव नार खुर्द व नार खास के बीचोबीच में नारद जी ने अपनी कुटिया बनाई थी कुटिया के ठीक सामने एक नदी बहती है जो नारद गंगा व तमसा नदी के रूप में पूर्व में जानी जाती थी लेकिन वर्तमान में उसे अब रिन्द नदी के नाम से जानते है
नदी की विशेष विशेषता
उस नदी की एक खास विशेषता यह है कि जितना नारद आश्रम के कुटिया का क्षेत्र है वहाँ तक उत्तर दिशा को बहती है और परिक्षेत्र खत्म होते ही पूर्व दिशा को बहने लगीं विद्वानों का मत है जो नदी किसी आश्रम में ऊतर दिशा को बहती है तो वह देव तुल्य हो जाती है इसी लिए इसे नारद गंगा भी कहते है
नारद जी ने यहीं दिया था उपदेश
बताते हैं राजा उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव को जब सौतेली माता रुचि ने पिता की गोद से हाथ पकड़ कर ध्रुव को निकाल दिया था और कहा था कि इतना ही शौख है तो मर कर हमारी कोख से जन्म लो तब तुम्हारा अधिकार होगा ध्रुव ने सारी बाद अपनी माता सुनीति को बताई तो माता को बहुत दुख हुआ लेकिन पाँच वर्ष की अवस्था मे तप करने के लिए ध्रुव इसी स्थान पर आए जहॉ पर नारद जी मिले और सार व्रतांत बताया नारद जी ने ॐ नमो भगवते वासुदेवः नमः का मंत्र देकर भगवत दर्शन कराए थे लेकिन आज उस स्थान पर किसी भी राज नेता व मंत्री की निगाह नहीं पड़ी जो कि जन कल्याण कारी देवर्षि नारद भगवान का स्थल को पर्यटन घोसित करसके।
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