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प्रशासन द्वारा कम लोगों की परमिशन मिलने के कारण रद्द किया गया उर्स इस वर्ष ख़ानक़ाह आने से महरूम रहेंगे अकीदतमंद

उत्तर प्रदेश न्यूज21संवाददाता
औरैया (फफूंद):हिंदुस्तान की सुप्रसिद्ध ख़ानक़ाह आस्ताना आलिया समदिया मिसबाहिया फफूंद शरीफ में हर साल होने वाला हुज़ूर हाफ़िज़े बुख़ारी रहमतुल्लाह अलैह का एक सौ उन्नीसवां उर्स इस साल कोरोना काल के चलते प्रशासन द्वारा अधिक संख्या में श्रद्धालुओं की परमीशन न मिलने की वजह से मुल्तवी (रद्द) कर दिया गया है । ये जानकारी ख़ानक़ाह के सज्जादा नशीन सैयद मु०अख़्तर चिश्ती मिस्बाही ने प्रेसवार्ता कर दी। मंगलवार को असताना आलिया समदिया के सज्जादानशीन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मीडिया को बताया कि हुज़ूर हाफिज़े बुख़ारी का इस साल 30, 31 जनवरी व 01 फरवरी को होने वाला ये 119 वां उर्स को इस साल मुल्क के हालत को देखते हुए कोरोना कॉल की वजह से सरकार ने राजनैतिक व धार्मिक कार्यक्रमों को करने के लिए कुछ निर्देश व नियम बनाये हैं सरकार की इन बातों को ध्यान में रखते हुए और वतन के मौजूदा हाल को देखते हुए हम कोई भी धार्मिक तथा राजनैतिक कार्यक्रम शासन व प्रशासन की परमिशन के बिना नहीं कर सकते।सरकार के इन निर्देशों का पालन करते हुए शासन व प्रशासन से उर्स की परमिशन मांगी गई थी जिसके जवाब में जिला प्रशासन की ओर से सिर्फ सौ लोगों के साथ उर्स करने की परमीशन दी गयी । उन्होंने बताया कि उर्स में उत्तर प्रदेश के अलावा मुल्क के अनेक राज्यों से हजारों की संख्या में लोग(श्रद्धालु)ख़ानक़ाह उर्स में शामिल होने के लिए आते हैं उर्स को सौ लोगों के साथ करना हमारे लिए ना मुमकिन है इसलिए इस साल मुल्क के हालात को देखते हुए हुज़ूर हाफ़िज़े बुख़ारी का 30, 31 जनवरी व 01 फरवरी को होने वाला 119वां उर्स केंसिल किया जा रहा है। वहीं उन्होंने ख़ानक़ाह से अकीदत रखने वाले मुरीदों (लोगों) से इस साल उर्स में आने से मना किया और अपने अपने घर पर ही फातिहा कर सवाब हासिल करने को कहा और कड़ाके की ठंड को देखते हुए उन्होंने मुल्क तमाम मुसलमानों विशेष रूप से ख़ानक़ाह से अक़ीदत रखने वाले लोगों से गरीबों और बे सहारा लोगों को गरम कपड़े व कंबल देकर उनकी मदद करने के साथ मदरसों के मौलवी व मस्जिदों के इमाम जिनकी कोरोना कॉल की वजह से तनख्वाह रुकी हुई है उनकी मदद करने की अपील की है।उन्होंने बताया कि ये चौथी बार है जब उर्स नहीं हो रहा है ।इससे पहले वर्ष 1971 में 1965 में तथा 1992 में उर्स का प्रोग्राम रद्द किया गया था । कोरोना काल में वर्ष 2021 में चौथी बार उर्स का प्रोग्राम रद्द हुआ है ।

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