नवनीत गुप्ता उत्तर प्रदेश न्यूज21ऑल इंडिया प्रेस एसोशिएशन
कानपुर:देश में 50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की समस्या बढ़ती ही जा रही है। इसका पता अधिकतर तब लगता है जब परेशानी बढ़ जाती है। अब इस समस्या की चपेट में 30 वर्ष तक के युवा आने लगे हैं, जिसके पीछे लाइफ स्टाइल डिसऑर्डर (जीवन शैली विकार) बड़ी वजह है। महज दो से तीन फीसद मामलों में जिनेटिक कारण है। संतुलित खानपान, व्यायाम और लक्षणों के आधार पर समस्या पर समय रहते काबू पाया जा सकता है।पहली बार जींस परिवर्तन पर शोध शामिल कर बड़े स्तर पर अध्ययन किया जा रहा है। इससे प्रोस्टेट कैंसर का शुरुआती चरण में ही पता लग सकेगा। यह कहना है शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार के लिए चयनित आइआइटी की बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायो इंजीनियरिंग की प्रो. बुशरा अतीक का। उन्होंने बातचीत में महत्वपूर्ण जानकारियां दीं, पेश है कुछ अंश...
प्रोस्टेट कैंसर पर आगे क्या प्रोजेक्ट है और किस स्तर पर शोध चल रहा है?
-डीबीटी वेलकल ट्रस्ट इंडिया लाइंस के सहयोग से पांच साल का प्रोजेक्ट है। इसमें केजीएमयू लखनऊ, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर, मुंबई व कोलकाता के टाटा हॉस्पिटल के विशेषज्ञ शामिल हैं। प्रोस्टेट कैंसर के कारण और निवारण पर अध्ययन किया जा रहा है। कौन अच्छे जींस निष्क्रिय और कौन बुरे जींस सक्रिय हैं, इनकी जांच होगी। कैंसर के प्रारंभिक कारणों का पता लगाया जाएगा। जांच का आसान तरीका विकसित करने की तैयारी है।
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