घनश्याम सिंह
समाचार संपादक
अलीगढ़:आदिवासी समाज का सम्मान व उसका उत्थान हमारी उन्नत सभ्यता का प्रमाण है,विश्व आदिवासी दिवस पर हम सब आदिवासी समाज" के अस्तित्व अस्मिता व अधिकारों को सुरक्षित करने का संकल्प लें-
लक्ष्मी धनगर:सक्रिय समाजसेविका
09 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशेष भेंट वार्ता में सक्रिय समाजसेविका लक्ष्मी धनगर ने बताया कि
आज ही के दिन वर्ष 1994 में संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव एंटोनियो ग्युटेरेस ने जेनेवा महासभा में सर्वसम्मति से विश्व के समस्त देशों में विश्व आदिवासी दिवस मनाने का निश्चय किया. आज का दिवस आदिवासियों की भाषा संस्कृति व स्वशासन परम्परा के संरक्षण और विकास के साथ साथ जल जंगल जमीन व खनिजों के पारंपरिक अधिकारों को संरक्षित रखने का दिवस है. देश की विभिन्न सरकारों ने इस दिवस के महत्व के बारे में आम नागरिकों कभी नहीं बताया और न ही इस देश के आदिवासियों को अपने अधिकारों के लिए जागरूक व प्रोत्साहित किया,दिनोदिन विकसित होती सभ्यता बढ़ते विज्ञान के प्रभाव के समय में यदि कोई समाज आज आदिवासी की जिंदगी जी रहा हो तो हमारी सोच का कोई मूल्य नहीं है,इसे विडंबना ही कहा जाए कि भारत समेत अनेक देशों में आज भी आदिवासियों की हालत 'दोयम दर्जे' की बनी हुई हैI आरक्षण से मामूली परिवर्तन हुआ है, समाज और शासन प्रशासन में इनके प्रति भेदभाव आज भी यथावत है.आदिवासी जब भी अपने अस्तित्व और अस्मिता पर मंडराते संकटों का सवाल उठाते हैं तो अंग्रेजी सरकार की तरह इन्हें विकास विरोधी कहकर अपमानित /प्रताड़ित किया जाता है, दुखद है कि उनके आस पास रहने वाले तथा कथित सभ्य समाज के लोग भी इस दुष्प्रचार व आरोप को सही मान कर इनके शोषण उत्पीडन पर मौन रहते हैंI औद्योगिकीकरण के नाम पर विभिन्न सरकारों द्वारा देश के जंगलों को बड़े निजी घरानों को लूट की खुली छूट दी जाती रही है, आदिवासियों द्वारा विरोध की आवाज़ उठाने पर शासन के लिए कानून व्यवस्था और देश की एकता और अखण्डता के लिए गंभीर ख़तरा बताया जाता है यह अनुचित है. आओ आज हम सब सभ्य समाज के नागरिक की हैसियत से अपने ही देश के अभिन्न अंग "आदिवासी समाज" के अस्तित्व अस्मिता व अधिकारों को सुरक्षित करने का संकल्प लें. जय हिन्द, जय आदिवासी समाज.
फ़ोटो:

एक टिप्पणी भेजें
If You have any doubts, Please let me know