प्राइवेट अध्यापकों की इस कोरोना काल मे कोई ना तो सुनने वाला है और ना विचार करने वाला।पिछले 4 महीनो से प्राइवेट अध्यापक/ कोचिंग संचालक अपनी जमा पूंजी से खर्च चला रहे है कोई सुध नही लेने वाला नही है क्या प्राइवेट अध्यापक/ कोचिंग संचालक खाना नही खाते? क्या उनका बिजली का बिल नही आता? क्या उनका परिवार नही है?सबके लिये नियम बन गये है हर नियम की धज्जियां उडाई जा रही है बाजार खुल सकते है भीड़ जमा हो सकती है बस चल सकती है आधी सवारी लेकर शराब के ठेके खुल सकते हैं तहसील खुल सकती है जहां हजारो लोग रोज आते जाते है शादीयो को अनुमती मिल सकती है 50 लोगो के साथ,आज कोई भी चीज बन्द नहीं है सिवाय विद्यालय/ कोचिंग सेंटर के अलावा क्या कोचिंग सेंटर या विद्यालय 1/2 या 1/3 बच्चो के बैठने के नियम के अनुसार नही खोले जा सकते हैं नही खोले जा सकते तो पूरी तरह से सब कुछ बन्द कर दो सम्पूर्ण लॉक डाउन कर दो।या प्राइवेट शिक्षको के लिये कोई व्यवस्था करो ताकि वो भी जिन्दा रह सके।शिक्षक देश की रीढ़ की हड्डी होते है उनको नजर अंदाज करना गलत है। प्रधानमंत्री जी से अनुरोध है कि समस्त प्राइवेट स्कूल व कोचिंग सेंटरों का ध्यान दे जिससे कि हम लोग भी अपना जीवन यापन कर सकें वहीं सेंटरों के बन्द होने पर भी हजारों रुपए ज्यादा किराया महीने का जा रहा है इसलिए इस विषय पर भी विचार किया जाएं। वहीं बच्चों की शिक्षा भी विखरती हुई नजर आ रही है माना आपने ऑनलाइन शिक्षा देने का प्रयास किया लेकिन वो गरीब क्या करे जिसके पास् मोबाइल ही नही वो कैसे ऑन लाइन शिक्षा गृहण कर सकते है।
कोरोना काल में बेबस होकर सरकार से की मांग खाएं या मर जाएं-ऋषभ त्रिवेदी
अनुराग सिंह (संपादक)
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