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विश्व स्तनपान सप्ताह थीम- “स्वस्थ समाज के लिए स्तनपान का संकल्प”शिशु की रोगों से रखनी हो दूरी तो स्तनपान है जरूरी

विश्व स्तनपान सप्ताह 
थीम- “स्वस्थ समाज के लिए स्तनपान का संकल्प”
शिशु की रोगों से रखनी हो दूरी तो स्तनपान है जरूरी

औरैया ।  विश्व स्तनपान सप्ताह दुनिया भर में एक से सात अगस्त तक मनाया जाता है। स्तनपान शिशु को न सिर्फ स्वस्थ रखने और भरपूर पोषण देने का काम करता है बल्कि उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने व समुचित विकास में भी मदद करता है। स्तनपान एक विकल्प नहीं बल्कि संकल्प है जो हर एक माँ अपने बच्चे के साथ करती है। जनपद के सभी
स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ़ नर्स द्वारा विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतर्गत प्रसूता महिलाओं को मां के दूध का महत्व और ठीक प्रकार से बच्चों को दूध पिलाने की प्रक्रिया और पद्धति समझायी जा रही है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अर्चना श्रीवास्तव बताती हैं कि दूध पिलाने से पहले साबुन-पानी से अच्छी तरह से हाथों को साफ़ कर लें, इस दौरान शारीरिक स्वच्छता भी बहुत जरूरी है । इससे शिशु में सभी पोषक पदार्थो की पूर्ति हो जाती है । छः माह की आयु तक शिशु को केवल स्तनपान कराने पर आम बाल्यकालीन रोग जैसे दस्त एवं निमोनिया में क्रमशः 11 प्रतिशत व 15 प्रतिशत कमी लायी जा सकती है। 
यूनिसेफ के मंडलीय समन्वयक आशीष शुक्ल बताते है कि यह साक्ष्य आधारित है कि जिन शिशुओं को एक घंटे के अंदर स्तनपान नहीं कराया जाता है उनमें नवजात मृत्यु दर की संभावना 33 प्रतिशत अधिक होती है। लैंसेट की 2016 की रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि अधिक समय तक स्तनपान करने वाले बच्चों की बुद्धि उन बच्चों की अपेक्षा तीन पॉइंट अधिक होती है, जिन्हें माँ का दूध थोड़े समय के लिए मिलता है। इसके अलावा स्तनपान माओं में स्तन कैंसर से होने वाली मौत को भी कम करता है।
सहार ब्लॉक के सामुदायिक केंद्र की स्टाफ़ नर्स कंचन बताती हैं की केंद्र में माँ को बच्चे को कैसे स्तनपान कराना है इसकी जानकारी दी गयी है। कोरोना महामारी की चपेट में कुछ ऐसी महिलाएं भी आ चुकी हैं,  जिनके बच्चे छोटे-छोटे हैं और स्तनपान करते हैं लेकिन मां के उपचाराधीन  होने पर शिशु को दूर रखा जा रहा है। 

 डब्ल्यूएचओ व यूनिसेफ ने जारी किए निर्देश

विश्व स्वास्थ्य संगठन ( डब्ल्यूएचओ) व यूनिसेफ ने इस संबंध में दिशा निर्देश जारी किए हैं, जिसमें  कहा है कि कोरोना उपचाराधीन  मां को भी स्तनपान अपने शिशु को कराना चाहिए, क्योंकि अभी तक किए गए शोध में यह साबित नहीं हुआ कि संक्रमित मां के स्तनपान कराने से शिशु में वायरस पहुंचते हैं। मां को स्तनपान कराते समय सावधानी बरतने की जरूरत हैं।

कोविड के दौरान स्तनपान से संबन्धित महत्वपूर्ण जानकारी-

• यदि माँ कोविड उपचाराधीन है या उसकी संभावना है, तब भी माँ शिशु को स्तनपान करा सकती है।
• यदि बच्चा बीमार है और वह कोविड उपचाराधीन है और यदि वह दूध पी पा रहा हो तो माँ अवश्य शिशु को स्तनपान कराये।
• यदि माँ स्तनपान कराने में सक्षम नहीं है तो परिवार के द्वारा माँ का दूध साफ कटोरी में निकालकर, साफ कटोरी चम्मच या कप से बच्चे को दूध पिलाया जा सकता है।

स्तनपान करे सावधानी के साथ, संक्रमण से करे बचाव-  यदि माँ को बुखार, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण हैं  तो वह-

• तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे।
• डॉक्टर के द्वारा बताई गयी बातों का पालन करे।
• जब बच्चे के संपर्क में हो तो मास्क जरूर पहने।
• खाँसते या छीकते वक्त अपने मुंह को मास्क या टिश्यू पेपर से ढके।
• खाँसने या छीकने के बाद या बच्चे को दूध पिलाने से पहले और बाद में अपने हाथों को साबुन से 40 सेकंड तक अच्छे से धुले।
• किसी भी सतह को छूने से पहले उसे साबुन या सैनिटाइज़र से अच्छे से साफ करे।

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