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मेरा बेटा मेरा अभिमान कभी ये भी बोलकर देखें-भावना ठाकर




बेटियों की बातें हर दूसरी पोस्ट पर हर दूसरे लेख में या हर चौथी कविता में पढ़ ली, कुछ गलत नही बेटियाँ बड़ी प्यारी होती है। पर आज एक एसा माहौल खड़ा कर दिया है सबने मिलकर की भाग्यशाली के घर ही बेटी पैदा होती है नसीब वालों की लकीरों में ही बेटी लिखी होती है। ये कहकर क्या हम बेटों के साथ अन्याय नहीं कर रहे ? तो क्या जिसके घर बेटा पैदा होता है वो पापी है ? नहीं ये एक ढ़ोंग है साहब बेटी के जन्म पर मानों मन को मना रहे हो ये सब लिखकर ही हम बेटे बेटी में फ़र्क कर रहे है।
कुछ एक को बाद करके समाज में हर तरह की जिम्मेदारी एक बेटा ही तो निभाता है। बेटियाँ ससुराल की नींव है और बेटे हमारी धरोहर है। पिता का दायां हाथ और बुढ़ापे की लाठी है। बहुत लोगों को कहते सुना है की जो प्यार बेटियाँ दे सकती है वो बेटे नहीं दे सकते। एसा क्यूँ?
मुझे तो मेरे दोनों बच्चों से एक सा प्यार मिला है। हाँ भावनाएँ जताने में बेटियों की तरह बेटे शायद खुलकर ना जता पाएँ, तो इसका मतलब यह नहीं है कि बेटे को हमारी परवाह नहीं है। बेटे को माँ पर प्यार लूटाते हमने तो खूब देखा और पिता की परवाह में आँखें नम करते भी खूब देखा। आज तक सुना है किसी बेटे ने शादी से पहले माँ बाप को वॄद्धाश्रम भेजा हो? मानों ना मानों उसके पीछे किसीकी लाड़ली बेटी का ही हाथ होता है।
दिल पर हाथ रखकर कहिएगा जितना बेटी ओर दामाद के साथ सब घुल-मिल जाते है क्या उतना बेटे बहू के साथ एडजस्ट होते है? क्यूँ आख़िर बेटे बहू को एक शक के दायरे में ही रखते है।
एक बार बेटे पर भरोसा करके देखिए बेटा कोई कसर नहीं छोड़ता फ़र्ज़ निभाने में,
बेटा मतलब हमारी भावनाओं की कोंपलें, बेटा मतलब फूल को झँखता वृक्ष, बेटा मतलब
हमारे जाने के बाद भी बेटियों के लिए मायके के खुल्ले दरवाज़े, बेटा मतलब अपने काँधे पर हर जिम्मेदारी को ढ़ोता सहारा।
बेटी के आँसू सबकी वोटसअप फेसबुक की वाॅल भिगोते है, बेटे के आँसू देखे है कभी ?
सुबह उठकर बेटा जब नौकरी की जुगाड़ में निकल जाता है तब एक माँ जब उसके तकिये का गिलाफ छूती है तो उसकी नमी दिल चीर देने वाली होती है। बेटी को चाहते रहो ताउम्र पर बेटों को समझो वो चाहने लगेगा आपको।
बेटे की भावनाओं को परवाज़ चाहिए थोड़ा सहला दो, हथेलियों से थामकर आपको अपने दिल के आसमान पर बिठाएगा।
बेटियों को एसे संस्कार दें की समाज में से वृद्धाश्रम का कलंक ही मिट जाए, बेटियाँ गुरुर है तो बेटे गृहस्थंभ का गौरव है। खानदान की नींव है। चलो आज ये भी कहे मेरा बेटा मेरा अभिमान है।।
भावना ठाकर #भावु
बेंगलोर, कर्नाटक

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