उत्तर प्रदेश न्यूज21
भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद और उसे लेकर चीन के अड़ियल रवैये का खामियाजा उसे व्यापारिक दृष्टि से भुगतना पड़ रहा है। चीन से अपना कारोबार समेट रही कंपनियों को आकर्षित करने के लिए भारत की ओर से किए गए प्रोत्साहन योजनाएं के एलान का असर अब दिख रहा है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार दिग्गज मोबाइल निर्माता कंपनी सैमसंग और एपल जैसी करीब दो दर्जन कंपनियां भारत में निवेश को लेकर रुचि दिखा रही हैं। इन कंपनियों की ओर से भारत में मोबाइल फोन फैक्टरी लगाने के लिए करीब 1.5 अरब डॉलर का निवेश किए जाने की उम्मीद है।
रिपोर्ट के अनुसार सैमसंग और एपल के अलावा फॉक्सकॉन, विस्ट्रॉन कॉर्प और पेगाट्रॉन जैसी कंपनियां भी शामिल हैं। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव और कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बीच ये कंपनियां सक्रिय रूप से अपनी आपूर्ति व्यवस्था में विविधता के लिए नई जगहों की तलाश कर रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार स्टैंडर्ड चार्टर्ड पीएलसी के हाल ही में हुए सर्वे में यह जानकारी सामने आई है। हालांकि, विदेशी कंपनियों के लिए कारोबार सस्ता करने के बावजूद भारत को इसका बड़ा फायदा नहीं हुआ है। इन कंपनियों की पहली पसंद वियतनाम बना हुआ है। इसके बाद कंबोडिया, म्यांमार, बांग्लादेश और थाईलैंड हैं।
हालांकि, सरकार को उम्मीद है कि अकेले इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में आने वाले पांच साल में 153 अरब डॉलर का सामान बनाया जा सकता है। इससे प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार के करीब 10 लाख अवसरों का सृजन होगा। विश्लेषकों के अनुसार इससे पांच साल में 55 अरब डॉलर का निवेश आने की संभावना है।

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