*🇮🇳शुभ घड़ी पन्द्रह अगस्त की🇮🇳*
शुभ घड़ी आज आई पन्द्रह अगस्त की ।
देकर स्वराज आज हमें भागे थे पातकी ।।
सीना ऊँचा किये गर्व से हम हैं कहते ।
भारत में मिल हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई रहते।।
देश एक है,वेश एक हो,एक यहां की भाषा हो।
जन जन में कल्याण छिपा हो नहीं निराशा हो।।
खेतों में हरियाली हो, शहरों में खुशहाली हो।
नहीं कहीं पर झगड़ों -दंगों से बदहाली हो।।
स्वतंत्रता का अर्थ यही वीरों का बलिदान न भूलें।
प्राण गंवाए मेरे हित तो यह अहसान न भूलें।।
उन्नति करके निज की देश बढ़ाएं आगे।।
फिर बहें दूध की नदियां दूर गरीबी भागे।
मातृभूमि जलथल नभ प्रिय हो प्राणों से।
इसकी शान बढ़ाने हमें लड़ना है तूफानों से।।
भूल गए हम मातृभूमि को दुर्व्यसनों में फंसकर।
छोड़ सभी दुष्कर्म एक हो जाओ हंस हंसकर।।
कल-कल करती गंगा यमुना ये संदेश सुनाती।
निरख दशा "भारत" की आज फट रही छाती।।
आजादी के महापर्व पर आज शपथ लें।
देशप्रेम नैतिकता श्रम का अपना पथ लें।।
👍-पत्रकार घनश्याम सिंह
त्रिभाषी रचयिता
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