उत्तर प्रदेश न्यूज21
प्रकाश चन्द्र त्रिपाठी(राघव) (प्रधानाचार्य)
*सुख-सुविधाओं में मुझको सच्चा आनंद नही मिलता*
*यदि गांव नहीं जाऊं तो अंतस का सुमन नहीं खिलता*
*संसाधन में नहीं तृप्ति तो रिश्तो के अनुभव में ही है*
*अपने गांव की पगडंडी से कभी तनाव नहीं मिलता*
*गांव में मस्त घूमता सदा बड़ों के पैर छुआ करता हूं*
*किसी को दुखी देखता कुछ देर पास बैठ लिया करता हूं*
*कदम गांव में जब जब रखता मन से निर्मल हो जाता हूँ*
*अपने पन की दुनिया में मैं बरबस खो हो जाया करता हूं*
*रोग शोक संताप गांव में तो सब के सब मिट जाते हैं*
*लल्ला भैया के उच्चारण से प्यार अनोखा पाते हैं*
*कष्ट कठिनाई भले हो गांव में पर कोई क्लेश नहीं,*
*प्राय: सब मिलजुल कर भोजन परसादी सा खाते हैं*
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