उत्तर प्रदेश न्यूज21 नवनीत गुप्ता लखनऊ:-अधिकारियों के ढुलमुल रवैये से नाराज प्रदेश के विभिन्न जिलों के हज़ारों अभ्यर्थी रोज सोशल मीडिया पर धरना दे रहे हैं। मामला 12460 शिक्षक भर्ती का है।उत्तर प्रदेश की शिक्षक भर्तियां इन दिनों सुर्खियां बनी हुई है। 69000 शिक्षक भर्ती सरकार की हठधर्मिता की भेंट चढ़ती जा रही हैं,वही सीबीई जांच से किसी तरह बची 68500 शिक्षक भर्ती में अभी भी पूरे पद नही भरे जा सके है। हर भर्ती में अधिकारी कोई न कोई ऐसा झोल करते हैं कि मामला न्यायालय के चौखट पर पहुच ही जाता है।खासकर शिक्षक भर्तियों में अनियमितता का एक लंबा इतिहास रहा है इसी तरह 12460 पदों एक शिक्षक भर्ती 15 दिसम्बर 2016 को आई थी। जिस पर योगी सरकार बनते ही रोक लगा दी गयी।मार्च 2018 में पुनः मुख्यमंत्री ने भर्ती को हरी झंडी दी।भर्ती में 51 जिलों में पद थे,और 24 जिलों में पद शून्य थे।अर्थात वहां पर एक भी पद नही थे।लिहाजा सरकार ने इन 24 जनपद के लोगों को प्रथम वरीयता के आधार पर 51 जिलों में किसी एक जिले में प्रथम वरीयता के आधार पर आवेदन करने का अवसर दिया।
सरकार के निर्देशानुसार ही 24 जनपद के हज़ारों युवाओं ने इस भर्ती में प्रतिभाग किया और अपने उच्च गुणांक (हाइ मेरिट) के बलबूते अपना चयन सुनिश्चित किया। लेकिन इसी दौरान कम मेरिट वाले अचयनित(जिनका चयन नही हुआ था) शिक्षामित्रों ने भर्ती को न्यायालय में उलझा दिया। इस पूरी प्रक्रिया के बीच भर्ती में लगभग 5000 लोगों को नियुक्ति प्रदान कर दी गयी और बाकी लोगों की नियुक्ति प्रक्रिया रोक दी गयी।
नियुक्ति से वंचित लोगों के धरना प्रदर्शन के बाद और मीडिया के भारी दबाव के बाद सरकार ने कोर्ट में नवम्बर 2018 में 619/2018 स्टेट आफ उत्तर प्रदेश थ्रू प्रिंसिपल सेक्रेटरी थ्रू प्रिंसिपल सेक्रेटरी बेसिक एजुकेशन v/s राम जनक मौर्य एंड टू अदर्श।
दाखिल तो कर दिया लेकिन नवम्बर 2018 से लेकर आज के दिन तक भर्ती न्यायालय के चौखट पर ही रुकी हुई है। मामला डेट पर डेट खिंचता जा रहा है। अधिकारी न्यायलय में पैरवी नही कर रहे , सरकार ने भी हमे उपेक्षित कर दिया है।
जिससे हजारो हाई मेरिट वाले योग्य अभर्थियों की नियुक्ति रुकी हुई है। 2018 से लेकर आज के दिन तक इस पर एक भी सुनवाई नही हुई है।और नियुक्ति से वंचित हज़ारो अध्यापक आज भी अपने नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं।नियुक्ति से वंचित 24 जिले के हज़ारो अभ्यर्थियों का कहना है, कि उनके मूल अभिलेख आज भी संबंधित जिले के बी एस ए दफ्तर में जमा है। जो स्कूल अलॉट हुए थे।वहां आज भी पद खाली पड़े हैं। बावजूद इसके अधिकारियों को कोई फिक्र ही नही है और सरकार भी उपेक्षित कर रही है।
नियुक्ति की आस देख रहे अंकित राजपूत, सत्यप्रकाश मधुकर, गायत्री, पूजा, श्रेया, मोहित जीतू राजपूत का कहना है,सुनवाई में कि सरकार का पक्ष रखने के लिए महाधिवक्ता इंगेज हैं।लेकिन एक भी सुनवाई पर नही गए है। न्यायालय का काम काज देख रहे अधिकारी भी नही जाते।
अभ्यर्थी इस बात से भी सरकार से नाराज हैं,क्योंकि सरकार ने इसके बाद आई 68500/69000 शिक्षक भर्ती में इतना भ्रस्टाचार होने के बावजूद बड़ी तत्परता के साथ पूरी कर रही हैं,वहीं हमारी भर्ती 2016 से रुकी हुई है। मामले को लगतार ट्विटर पर ट्रेंड करवाने में अग्रणी रहने वाले सूरज गुप्ता कहते हैं, कि हम लोग लगतार मुख्यमंत्री जी, शिक्षामन्त्री जी को लगतार ट्वीट कर जल्द से जल्द सुनवाई करा नियुक्ति देने की अपील कर रहे हैं,लेकिन इसका कोई फायदा नही। क्युकी हमारी बात सुनने वाला कोई नही है!
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