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*चार दर्जन संगठनों की अध्यक्षता में,राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश की पहली समीक्षात्मक बैठक सम्पन्न हुई*

  उत्तर प्रदेश न्यूज -21संवाददाता नवनीत गुप्ता                           उत्तर प्रदेश:कोराना संकट को देखते हुए विगत दिनांक 17 मई को उत्तर प्रदेश के शिक्षक- कर्मचारी व अधिकारियों के बड़े व प्रभावशाली संगठनों सहित लगभग चार दर्जन संगठनों के नेतृत्वकर्ता रहे। सभी ने एक स्वर में सरकार द्वारा मनमाने ढंग से थोपी जा रही नीतियों का विरोध किया, एवं आने वाले दिनों में सरकार की दमनकारी नीतियों के विरोध में एक वृहद आंदोलन करने के संकेत दिए।
■ बैठक में सरकार द्वारा महंगाई भत्ता सहित अन्य लगभग 15 भत्तों पर कैची चलाए जाने और सरकार तथा नौकरशाहों की भूमिका पर विचार रखते हुए सभी संगठनों के शीर्ष पदाधिकारियों ने अपना विरोध दर्ज किया तथा संयुक्त प्रदेशव्यापी आंदोलन पर जोर दिया ।
■ इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में  रेलवे के राष्ट्रीय नेता कामरेड प. शिव गोपाल मिश्र, अधिकारी महापरिषद के संरक्षक बाबा हरदेव सिंह आदि ने अपने विचार रखते हुए इन भत्तों की कटौती के किये चंद नौकरशाहों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया । बैठक में सभी वरिष्ठ नेताओं ने अपने अपने संगठनों का प्रतिनिधित्व करते हुए सरकार के खिलाफ होने वाले आंदोलन में अपने  समर्थन का आश्वासन दिया। 
■ बैठक में कर्मचारी नेताओं के द्वारा कहा गया कि सरकार के चंद अधिकारियों ने प्रदेश के बड़े कर्मचारी संगठनों की चिन्ता अब और बढ़ा दी है। दरअसल में प्रदेश सरकार कर्मचारियों की किसी भी मांग पर न ही ध्यान दे रही है और नही कर्मचारी संगठनो को विश्वास में लेेकर निर्णय कर रही है। यही चिन्ता का कारण अब सरकार और कर्मचारियों के बीच संघर्ष की स्थिति उत्पन्न कर रहा है। कोविड 19 महामारी फैलने के पूर्व में परिवार कल्याण प्रोत्साहन भत्ते सहित छह भत्तों पर रोक कर सरकार पहले ही कर्मचारियों के प्रति अपनी मंशा प्रर्दशित कर चुकी है। अब महामारी की आड में अन्य 6 भत्तों को पहले स्थगित करने के उपरान्त एक सप्ताह के भीतर समाप्ति का निर्णय लिया गया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि वित्त विभाग के कुछ अधिकारी सरकार से कर्मचारियों के विरूद्व ऐसे निर्णय करा रहे है। जिससे हर सम्भव स्तर पर कर्मचारी सरकार से नाराज होकर आन्दोलन को बाध्य हो जाए। इसी कारण से उक्त अधिकारियों ने सुनियोजित तरीके से पहले भत्ते स्थगित कराने के बाद उन्हे समाप्त कराने का निर्णय कराया है। संगठन के पदाधिकारियों द्वारा भविष्य निधि की ब्याज दर में कटौती, नई पेंशन स्कीम में सरकार के अंशदान को 14 प्रतिशत के स्थान पर 10 प्रतिशत कर देना, सचिवालय विशेष भत्ता समाप्त करना, रिसर्च भत्ता आदि को पूरी तरह खत्म करना उन्हें आन्दोलन के लिए उकसाने के लिए काफी है। आज की वीडियों कान्फेसिंग के माध्यम से समन्वय वार्ता, चर्चा में बड़े कर्मचारी नेताओं का आक्रोष इस बाॅत संकेत है,कि लाॅक डाउन खुलने के बाद कर्मचारी, शिक्षक और अधिकारियों के आन्दोलन की रूपरेखा सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने को तैयार है।
■ सभी ने कहा कि लाखों शिक्षक-कर्मचारी-अधिकारी अपनी जान पर खेलकर देशहित में जहां पूरी  कर्मठता से रात और दिन कार्य कर रहे हैं। इसके बावजूद न तो सभी कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है, न ही उनके आर्थिक भविष्य की सुरक्षा का। अब हर कदम पर शोषण बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
■ बड़ी रणनीति बनाने हेतु पुनः एक और बैठक बहुत जल्द किये जाने की प्रबल संभावना है, जिसकी तिथि का खुलासा अभी खुल कर नहीं किया गया। जो भी हो सरकार के कर्मठ अंगों का सरकार से रूष्ट होना एक अच्छे माहौल की निशानी नहीं कहा जा सकता, वो भी तब जब सभी अंग अपनी जान-माल की चिंता किए बगैर सरकार की इज्जत बचाने में दिन-रात एक किए हों !
■  बैठक में रेलवे, प्राथमिक शिक्षक,माध्यमिक शिक्षक, विश्वविद्यालय शिक्षक,स्वास्थ्य, राजस्व, सचिवालय,विकास प्राधिकरण,डिप्लोमा महासंघ,परिवहन, इनकमटैक्स, शिक्षा,कलेक्ट्रेट,श्रम,पोस्टल,कृषि,कोषागार, मिनिस्ट्रियल,चतुर्थ श्रेणी, वाहन चालक आदि सभी मुख्य विभागों व संवर्ग के बड़े संगठनों के नेतृत्वकर्ता मौजूद रहे !
■ बैठक हेतु सभी प्रतिनिधियों का कोर्डिनेशन प्रदेश महामंत्री श्री शिवबरन यादव जी द्वारा किया गया।

*इंजी हरि किशोर तिवारी*
*प्रदेश अध्यक्ष, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश*

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