Top News

क्लोरोक्वीन" के लिए अमेरिका का भारत पर दबाव अनुचित"*-घनश्याम सिंह

उत्तरप्रदेश:कोरोना" महामारी से पूरा विश्व जूझ रहा है,सभी देश अपने नागरिकों के जीवन की सुरक्षा के लिए प्रयत्नशील हैं,पर एक बात समझ में नहीं आ रही "विश्व का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका क्लोरोक्वीन के लिए भारत पर अनुचित "दबाव" क्यों दे रहा है,भारत भी तो "कोरोना" संकट से जूझ रहा है,अमेरिका महा विकसित देश है,क्या वह क्लोरोक्वीन के लिए दूसरे देश पर निर्भर है या वह अपना स्टाक सुरक्षित रखना चाहता है,भारत के लिए ये वही बात हुई कि "हमें दे सूप तू हाथों फूंक" महाबली अमेरिका भारत को बहुत लंबे समय से पड़ोसी देशों  द्वारा उत्पीड़ित देख रहा है,इसके पूर्व का इतिहास भी तो उन्हें मालूम होगा कि मुस्लिम शासक कुतबुद्दीन एवक,मोहमद गोरी, महमूद गजनवी आदि व ईस्ट इण्डिया कम्पनी के नाम पर आये अंग्रेजों ने भारत को जमकर शोषित किया,इधर अब पड़ोसी लम्बे समय से भारत का उत्पीड़न कर रहे हैं,वे भारत के साथ प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष युद्ध लड़ रहे हैं वे भारत की ही चोरी कर रहे हैं भारत को ही आंख दिखा रहे हैं,वह भलीभांति जानता है,अमेरिका चाहता तो भारत का न्यायिक पक्ष लेता,पर वह जैसी क्लोक्वीन के लिए भारत पर दो टूक "दबाव" दे रहा है वह ऐसे कभी पड़ोसी देशों से भी दो टूक कहता,अभी हाल में महाबली अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप भारत आये तो पूरे देश ने उनके स्वागत में पलक पांवड़े बिछा दिए और हमारे प्रधानमंत्री मंत्री मोदी जी "अतिथि देवो भव" की भारतीय संस्कृति का अनुपालन करते हुए उनके भव्य स्वागत में डेढ़ टांग खड़े रहे,क्या इसीलिए उन्होंने क्लोरोक्वीन के लिये भारत पर नाहक दबाव दिया,वाह ट्रंप जी "अच्छा सिला दिया तुमने मोदी जी को स्वागत सत्कार का" काश! पड़ोसी देशों को सरासर भारत के प्रति अन्याय करने के लिये ऐसे आंख दिखाते,अरे बताते हैं "कोरोना"उन्हीं के यहां से आया तो उन्हीं का हक बनता है सारे पीड़ित देशों को औषधियां उपलब्ध कराते,अरे इस पर तो आप कुछ नहीं बोल रहे हैं,अरे एक और कहावत याद आ गयी कि धो. से नहीं जीते तो गधे के ही कान ऐंठ दिए,भाई समझ में नहीं आया आपका ये "मधुर" व्यवहार, एक बात और यदि कोई आपके साथ ऐसा करे तो कैसा लगेगा, ट्रंप जी बुरा न मानना मेरा विचार "होली" यानी पवित्र है,हम तो माननीय  मोदी जी के आवाहन पर घर पर लॉक डाउन का पालन कर रहे हैं,मां सरस्वती की अपार अनुकंपा से आलेखन का असीम आशीर्वाद मिला है दिल में कष्ट हुआ इसलिए थोड़ा लिख दिया पर समझना ज़्यादा,  हमें गर्व है कि हम भारतीय हैं,जय जगत हमारा नारा है,वसुधैव कुटुम्भकम हमारा ध्येय है,आओ हाथ बढ़ाओ, मानवता के कल्याण के लिए मिलकर कार्य करें,हम सब "मानव"एक ही जगत पिता ईश्वर की संतान हैं,सभी उसके सेवक हैं,वह एक मात्र सबका स्वामी है,विश्व में शांति सुख हो,उसी ईश्वर से प्रार्थना करें-
"एक कर दे हृदय अपने सेवकों के हे प्रभू!
निज महान उद्देश्य उन पर कर प्रकट मेरे विभू!!
दृढ़ रहें तेरे नियम पर तेरी शिक्षा पर चलें!
बन सहायक शक्ति दे वे तेरी सेवा में ढलें!!
कर प्रफुल्लित हृदय रख दे वरद हस्त स्नेह का!
है तू ही उनका सहायक और स्वामी सर्वदा!!
      एक कर दे हृदय.....
     ---*घनश्याम सिंह*
       पत्रकार/साहित्यकार
        समाचार संपादक

Post a Comment

If You have any doubts, Please let me know

और नया पुराने