उत्तरप्रदेश न्यूज़21
बिधूना:कोरोना संकट के बीच 14 अप्रैल को यानी मंगलवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर की 129वीं जयंती है. ऐसे में लॉकडाउन के चलते दलित व अन्य समुदाय के सामाजिक नेताओं और राजनीतिक पार्टियों के द्वारा अंबेडकर जयंती को अपने-अपने घरों से मनाने की अपील की गई है. ऐसे में इस बार सियासी पार्टियों को अंबेडकर के नाम पर राजनीति का उद्देश्य नही रहा
14 अप्रैल को संविधान निर्माता बाबा साहेब की 129वीं जयंतीराजनीतिक दलों की अंबेडकर जयंती को घर पर मनाने की अपील
देश में कोरोना वायरस का कहर बढ़ता ही जा रहा है, जिसे देखते हुए कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने प्रदेश में लॉकडाउन बढ़ा दिया है. वही, केंद्र सरकार की ओर से भी लॉकडाउन अवधि बढ़ाने के संकेत मिल रहे हैं. कोरोना संकट के बीच 14 अप्रैल को यानी मंगलवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर की 129वीं जयंती है. ऐसे में लॉकडाउन के चलते दलित समुदाय के सामाजिक नेताओं और राजनीतिक पार्टियों के द्वारा अंबेडकर जयंती को अपने-अपने घरों से मनाने की अपील की गई है. ऐसे में राजनीतिक दलों को डॉ. अंबेडकर के नाम पर सियासत करने का कोई उद्देश्य नही रहा
जिसमे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के वीसीपीएम सत्येंद्र बाबू ने बताया कि कोरोना वायरस के चलते हम इस बार हमने गरीबो को मास्क व 80 लोगो को 500-500 रुपये भी दिए है जिससे गरीबो के भरण पोषण में आसानी रहे बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यारोपण कर श्रद्धांजलि दी हैं.और कहा आप लोग लॉकडाउन की वजह से लोग अपने-अपने घरों से अंबेडकर जयंती मनाएं, इसके लिए हमने अपनी वेबसाइट पर ऑनलाइन बाबा साहेब को श्राद्धंजलि देने और उनकी मूर्ति पर माल्यारोपण करने की व्यवस्था रखी है. साथ ही उन्होंने कहा कि कोरोना के चलते इस बार बाबा साहेब के नाम सियासी रोटियां सेंकने वालों को भी मौका नहीं मिल पाएगा.
प्रधानाध्यापक सुरेश बाबू कहते हैं कि आज देश की हालत ऐसी है कि उनके समर्थक अपने-अपने घरों में रहकर बाबा साहेब की जयंती पर दिया जलाएं. धर्मेंद्र कुमार (सीआरपीएफ) कहते हैं कि दलित समुदाय की स्थिति को देखकर डॉ. अंबेडकर ने अपनी 50वीं जयंती पर 1942 में मुंबई के कामगार मैदान में घोषणा की थी कि आज के बाद वो अपना जन्मदिन नहीं मनाएंगे. इस दौरान वह अंग्रेजों, मुस्लिम लीग और कांग्रेस पर जमकर बरसे थे और दलित समुदाय की स्थिति कैसे सुधरे, हमेशा इस दिशा में कोशिश की थी. आज अंबेडकर जयंती पर कई सौ करोड़ रुपये खर्च किए कर सियासत की जा रही है लेकिन दलितों समुदाय के लिए कोई संस्थान नहीं खोला जा रहा है.
भारतीय राजनीति के केंद्र में डॉ. अंबेडकर
बता दें कि मौजूदा भारतीय सियासत में डॉ. अंबेडकर देश के सबसे बड़े पॉलिटिकल ब्रैंड बन गए हैं. बाबा साहेब के नाम पर आयोजन इतने होने लगे हैं कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी उनसे पीछे छूट गए हैं. पिछले कुछ सालों से केंद्र और राज्य सरकारों से लेकर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से उनकी जयंती और परिनिर्वाण दिवस को देश में धूमधाम और बड़े पैमाने पर मनाया जाता है. इसके पीछे दलित समुदाय के वोटों के सियासत के तौर पर देखा जा रहा है.
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देश का दलित समुदाय डॉ. अंबेडकर को अपने मसीहा के तौर पर देखता है. दलित समुदाय ने इसे राजनीति के केंद्र में ला दिया है. बीजेपी और आरएसएस पिछले कुछ सालों से दलितों के बीच पैठ बनाने की कोशिश में हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 के बाद से हर साल अंबेडकर जयंती के मौके पर उनसे जुड़े हुए स्मारकों पर जाते हैं. वहीं, बसपा प्रमुख मायावती तो हर साल लखनऊ के अंबेडकर पार्क में जाकर बाबा साहेब की मूर्ति पर माल्यारोपण करती हैं और बड़ा कार्यक्रम करती हैं. ऐसे ही कांग्रेस भी खुद को दलित हितैषी पार्टी साबित करने के लिए हरसंभव कोशिश करती है. हालांकि, इस बार कोरोना के संक्रमण के चलते राजनीतिक दलों को अंबेडकर के नाम पर सियासत करने का मौका नहीं मिल पा रहा है.
अंबेडकर के नाम से शुरू होती है बसपा की सियासत
बसपा की सारी राजनीति दलित समुदाय के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है और डॉ. अंबेडकर बसपा के सबसे बड़े प्रतीकों में से एक हैं. अरुण गौतम व अतुल कुमार कहते है 'वर्तमान में कोरोना वायरस महामारी के चलते सभी से अपील है कि सरकारी पाबंदियों का सख्ती से अनुपालन करते हुए, अपनी रगों में बसने वाले बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर की जयंती को अपने-अपने घरों में ही मनाएं, यही बेहतर होगा.' उन्होंने कहा कि इस महामारी के दौरान भी हो रही दयनीय स्थिति और उत्पीड़न के बारे में और इससे मुक्ति पाने के लिए भी गंभीरता से जरूर चिंतन करना चाहिए.
वहीं, ओमप्रकाश व छोटे ने अपने घर पर ही डॉ. अंबेडकर की फोटो पर माल्यार्पण कर इसका प्रचार-प्रसार सोशल मीडिया पर करें. बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि कार्यकर्ताओं को संविधान, सामाजिक समानता और समरसता के बारे में डॉ. अंबेडकर के विचारों पर निबंध भी लिखना चाहिए। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव संबंधी मानकों और संक्रमण फैलने से रोकने के लिए ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ का पालन करते हुए अपने इलाके की गरीब बस्तियों में राशन और मास्क बांटने करने की अपील की है.इसी मौके पर प्रवेश कुमार व अन्य साथी मौजूद रहे
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