राजधानी के वरिष्ठ पत्रकार व प्रमुख साहित्यकार की बेटी अपहरण प्रदेश की कानून व्यवस्था को खुली चुनौती:
■ पत्रकार की बेटी का बहला-फुसला कर पांच दिन पूर्व किया गया था अपहरण
■ कब तक चलेगा बहला-फुसला व अपहरण कर शादियां किये जाने का षडयंत्र:कब तक समाज विरोधी षडयंत्रकारी उठाते रहेंगे कानून का नाजायज़ लाभ
"उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के वरिष्ठ लेखक और पत्रकार पी के सिंह पाल की छोटी बेटी एकता पाल (35 वर्ष) अपने घर से 3 जनवरी 2020 की सायं 4.00 बजे गायब हो जाना वास्तव में कानून व सामाजिक व्यवस्था को बड़ी चुनौती है,एक वरिष्ठ पत्रकार और वरिष्ठ साहित्यकार जो हमेशा समाज और कानून की रक्षा-सुरक्षा में खुद को समर्पित रखता हो उसके परिवार को नीचा दिखाने के लिए निश्चय ही किसी बड़े षडयंत्र के तहत बेटी का अपहरण किया गया है,मैं यह मानता हूँ यह घटना प्रजातंत्र के चौथे खंभे पर ही तमाचा नहीं है बल्कि यह घटना समूचे प्रजातंत्र पर करारा तमाचा है पीड़ित पिता पी के सिंह का कहना है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने बड़े षडयंत्र के तहत खुद को सरकारी नौकरी में बताकर मानसिक रूप से अपनी उम्र के सामान्य युवती की तरह न होने के कारण मासूम बेटी को गुमराह करके घर से दूर किसी अज्ञात स्थान पर बुलाकर उसे अगवा कर लिया है। इससे पहले उसने अगवा की हुई युवती से संदेहास्पद पत्र भी लिखवाया जिसमें युवती के द्वारा सरकारी नौकरी करने वाले युवक से शादी करने की बात लिखी है। पत्र में युवक का नाम, पता आदि कुछ भी नहीं लिखा गया है,
युवती के पिता पी के सिंह ने घटना की अगली सुबह 4 जनवरी को थाना पी.जी.आई. थाने जाकर बेटी द्वारा लिखा पत्र पुलिस के सुपुर्द किया। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट गुमशुदगी में दर्ज कर ली है जबकि यह पूरा मामला बरगला कर अपहरण करने का पहली ही दृष्टि में मालूम पड़ता है,पिता के अनुसार बेटी अकेले घर से नहीं जाती थी। वह रोजाना पिता के कार्य से ईमेल, फेसबुक तथा वाट्सअप का उपयोग करती थी। इन्हीं संचार माध्यमों से वह किसी व्यक्ति के सम्पर्क में आ गयी। और उस बदमाश व्यक्ति ने उसके भोले स्वभाव का फायदा उठाकर उसे अपह्रत किया है।
किसी भी सम्भावित कार्यवाही से बचने के लिये 6 जनवरी की प्रातः 10 बजे अभियुक्त (अज्ञात) द्वारा युवती के घर पर भाई के मोबाइल पर किसी दूसरे के मोबाइल से फोन आया जिसमें युवती के घर पर अपने भाई से उस अनजान युवक से शादी की बात कहते हुये दो-तीन दिन में घर वापस आने की बात कही जबकि भाई का कहना है कि बात करते हुये वह काफी डरी हुई और असहज प्रतीत हो रही थी। ऐसा लग रहा था कि उस पर दबाव डालकर
बड़ा भय दिखा कर यह फोन करवाया गया है।
मोबाइल नम्बर के बारे जानकारी करने पर वह बंथरा, कानपुर रोड, लखनऊ के किसी सब्जी बेचने वाले का निकला जिसका कहना है कि किसी शख्स ने अपने पास मोबाइल न होने की बात कह कर उसे मोबाइल करने के लिये माँगा था। इस घटना से इस बात की आशंका और बढ़ जाती है कि
पीड़ित पत्रकार की बेटी किसी शातिर किस्म के अपराधी के चंगुल में फंस गई है। यह मामला अब किसी एक थाने तक सीमित न होने के कारण पीडित परिवार ने 7 जनवरी को एस.एस.पी. लखनऊ सिटी से मिलकर उन्हें पूरे मामले से लिखित में अवगत भी कराया, उन्होंने त्वरित कार्यवाही करने का भरोसा भी परिवार को दिया पर उसका सार्थक परिणाम अब तक सामने नहीं आया है,जब एक वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकार को न्याय मिलने में इतना विलम्ब हो सकता है तो आम जनता का क्या होगा?।
पीडित परिवार बार-बार यह आशंका जता रहा है कि पुलिस को घटना के क्षेत्रों एल्डिको-2 तथा बंथरा
में लगे सीसीटीवी कैमरों को देखना चाहिए। उनका कहना है कि बेटी एकता के पास दो माह पूर्व खरीदा एक नया मोबाइल भी है जिसे वह डिब्बे तथा उसमें रखी रसीद सहित ले गयी है। मोबाइल विक्रेता उस मोबाइल का एमआई नम्बर देने से इंकार कर रहा है। पुलिस यदि सख्ती करे तो मोबाइल का एमआई नम्बर मिल सकता है।
आगे परिवार का कहना है कि पुलिस द्वारा यदि त्वरित कार्यवाही नहीं की जाती है तो उनकी बेटी के साथ कोई भी गम्भीर घटना एवं दुर्घटना हो सकती है। युवती के पिता का यह भी कहना है कि उनकी बेटी मानसिक रूप से सामान्य बच्चों की तरह की नहीं है जिसकी वजह से अनहोनी की आशंका बहुत अधिक बढ़ जाती है। संदिग्ध अपराधी शादी का झांसा देकर तथा सरकारी नौकरी में होने की बात कहकर या बड़ी साजिश के तहत युवती का शारीरिक शोषण भी कर सकता है। लगातार चालाकी से अपनी पहचान छिपाकर वह पीडित परिवार तथा पुलिस को धोखे में रखकर किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है
, कोई भी सरकारी नौकरी करने वाला व्यक्ति इस तरह की अपराधिक गतिविधियों में अपने को संलग्न करके अपनी नौकरी को खतरे में नहीं डाल सकता है,
मेरा इस संबंध में समाज और सरकार से सीधा सवाल है कि ऐसी घटनाओं को अंजाम देकर परिवार-समाज और सामाजिक व्यवस्था को कब तक नेस्तनाबूत किया जाता रहेगा ?
व कब तक कानून का नाजायज़ लाभ उठाकर
"बहन-बेटियों का बहला-फुसला व अपहरण कर शादियां किये जाने का षडयंत्र होता रहेगा?
"कब तक शादी की मनमर्जी के नाम पर मां-बाप,परिवार की इज्जत की बर्बादी होती रहेगी?
"अरे समाज के ठेकेदारों जागो!
और बदलो पाश्चात्य सभ्यताओं को बढ़ावा देने वाले ऐसे विवाह कानून जो प्रेम विवाह के नाम पर समाज में नफ़रत फैलाने का काम कर रहे हों,क्या मनमर्जी और मां-बाप की इज्ज़त को सरेआम नीलाम करने वाली शादियां "प्रेम-विवाह हो सकती हैं, इन्हें प्रेम विवाह की संज्ञा कदापि न दी जाय,अभी कुछ दिन पूर्व एक राजनीतिज्ञ की बेटी के साथ भी ऐसा हुआ था,
लगता है ऐसी ही पुनरावृत्ति के लिए इस बेटी का अपहरण हुआ है,
जागो!समाज के पहरेदारों ! ऐसे मामलों का समर्थन करते-करते व चुप्पी साधते कहीं तुम्हारे साथ ऐसी घटना न हो जाय,
👍 पीड़ित माता-पिता की बेटी से करुण पुकार
प्रिय दुलारी बेटी ! तुम हमसे सम्पर्क करो!
ईश्वर उन्हीं की सहायता करता है, जो अपनी सहायता स्वयं
करने की कोशिश करते हैं!
जब तक तुम घर नहीं आओगी हम चैन से नहीं बैठेंगे,हम व तुम्हारी मम्मी,भाई सारे रिश्तेदार,मित्र बहुत परेशान हैं। हम तुम्हारी बहिन के कैंसर से डेढ़ साल पहले मृत्यु हो जाने से पहले से ही दुखी हैं,तुम्हें गुमराह कर तुम्हें व तुम्हारे परिवार को धोखा देने वाला तुम्हारा कदापि नहीं हो सकता है
कोई तुमसे
धोखाधड़ी
करके तुम्हारी मासूम भावनाओं से पिछले पांच दिनों से खेल रहा है।
बेटी तुम जहां भी हो
साहस से उसके चगुंल से मुक्त होने की कोशिश करो, तुम बहुत भोली हो। अपने विवेक व साहस को जगाओ। तुम जैसी भी हालत में घर आओगी तुम्हारा सदैव हार्दिक स्वागत है क्योंकि तुम मेरे जिगर का टुकड़ा हो। तुम्हारी परिवार तथा समाज को बहुत आवश्यकता है। तुम समाज की कम्प्यूटर के द्वारा बहुत उपयोगी सेवा कर रही थी। उसने इण्टरनेट के द्वारा ही तुमसे सम्पर्क बनाया है।
आजकल साइबर अपराध बड़ी संख्या में हो रहे हैं। तुम भी साइबर अपराध का शिकार हो गयी हो। तुम्हारे साथ का व्यक्ति तुम्हारे भविष्य तथा जीवन के लिए बहुत बड़ा खतरा है। वह तुम्हारा शोषण करके तुम्हें कहीं भी छोड़कर या किसी दूसरे अपराधी व्यक्ति को बेचकर भाग जायेगा। यह वह पुलिस से बचने के लिए अपना सबूत मिटाने के लिए तुम्हारी हत्या भी कर सकता है। क्या उसने तुम्हें अपने माता-पिता से मिलाया है? यदि नहीं तो क्यों सोचो? उसके घर वाले कैसे दूसरे की बेटी को इस तरह से अपने घर में रखे हैं। यह बहुत बड़ा अपराध है। तुम्हारे परिवार के लोग सदैव तुम्हारे साथ हैं।
👍 मीडिया जगत से सहयोग की अपील
प्रिय आत्मीय बन्धु/मीडिया बन्धुओं को बाइक से घूमते ये दोनों दिखाई पड़े पुलिस या हमें सूचित करें। हम केवल अपनी बेटी को सुरक्षित अपने घर में देखना चाहते हैं। इसके लिए हम बड़े से बड़ा बलिदान करने को तैयार है। ईश्वर उन्हीं की रक्षा करता है जो अपनी रक्षा स्वयं करने की कोशिश करते हैं। बेटी की फोटो मीडिया बन्धु, अपने न्यूज चैनल, समाचार पत्र, न्यूज पोर्टल, बाजार, दुकान में प्रचारित-प्रसारित करें। ताकि
बेटी का अपहरण करने वाला अपराधी पकड़ा जाये। कानून उसे सख्त सजा देगा। ताकि आगे से कोई बेटी से इतना बड़ा धोखा करने का कोई अपराधी साहस न करें।
दुखी माता-पिता
वरिष्ठ पत्रकार/साहित्यकार
पीके सिंह पाल एवं
श्रीमती यू सिंह
फ़ोटो:
2-पीड़ित पिता
UPNEWS21
पत्रकार घनश्याम सिंह■ पत्रकार की बेटी का बहला-फुसला कर पांच दिन पूर्व किया गया था अपहरण
■ कब तक चलेगा बहला-फुसला व अपहरण कर शादियां किये जाने का षडयंत्र:कब तक समाज विरोधी षडयंत्रकारी उठाते रहेंगे कानून का नाजायज़ लाभ"उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के वरिष्ठ लेखक और पत्रकार पी के सिंह पाल की छोटी बेटी एकता पाल (35 वर्ष) अपने घर से 3 जनवरी 2020 की सायं 4.00 बजे गायब हो जाना वास्तव में कानून व सामाजिक व्यवस्था को बड़ी चुनौती है,एक वरिष्ठ पत्रकार और वरिष्ठ साहित्यकार जो हमेशा समाज और कानून की रक्षा-सुरक्षा में खुद को समर्पित रखता हो उसके परिवार को नीचा दिखाने के लिए निश्चय ही किसी बड़े षडयंत्र के तहत बेटी का अपहरण किया गया है,मैं यह मानता हूँ यह घटना प्रजातंत्र के चौथे खंभे पर ही तमाचा नहीं है बल्कि यह घटना समूचे प्रजातंत्र पर करारा तमाचा है पीड़ित पिता पी के सिंह का कहना है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने बड़े षडयंत्र के तहत खुद को सरकारी नौकरी में बताकर मानसिक रूप से अपनी उम्र के सामान्य युवती की तरह न होने के कारण मासूम बेटी को गुमराह करके घर से दूर किसी अज्ञात स्थान पर बुलाकर उसे अगवा कर लिया है। इससे पहले उसने अगवा की हुई युवती से संदेहास्पद पत्र भी लिखवाया जिसमें युवती के द्वारा सरकारी नौकरी करने वाले युवक से शादी करने की बात लिखी है। पत्र में युवक का नाम, पता आदि कुछ भी नहीं लिखा गया है,
युवती के पिता पी के सिंह ने घटना की अगली सुबह 4 जनवरी को थाना पी.जी.आई. थाने जाकर बेटी द्वारा लिखा पत्र पुलिस के सुपुर्द किया। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट गुमशुदगी में दर्ज कर ली है जबकि यह पूरा मामला बरगला कर अपहरण करने का पहली ही दृष्टि में मालूम पड़ता है,पिता के अनुसार बेटी अकेले घर से नहीं जाती थी। वह रोजाना पिता के कार्य से ईमेल, फेसबुक तथा वाट्सअप का उपयोग करती थी। इन्हीं संचार माध्यमों से वह किसी व्यक्ति के सम्पर्क में आ गयी। और उस बदमाश व्यक्ति ने उसके भोले स्वभाव का फायदा उठाकर उसे अपह्रत किया है।
किसी भी सम्भावित कार्यवाही से बचने के लिये 6 जनवरी की प्रातः 10 बजे अभियुक्त (अज्ञात) द्वारा युवती के घर पर भाई के मोबाइल पर किसी दूसरे के मोबाइल से फोन आया जिसमें युवती के घर पर अपने भाई से उस अनजान युवक से शादी की बात कहते हुये दो-तीन दिन में घर वापस आने की बात कही जबकि भाई का कहना है कि बात करते हुये वह काफी डरी हुई और असहज प्रतीत हो रही थी। ऐसा लग रहा था कि उस पर दबाव डालकर
बड़ा भय दिखा कर यह फोन करवाया गया है।
मोबाइल नम्बर के बारे जानकारी करने पर वह बंथरा, कानपुर रोड, लखनऊ के किसी सब्जी बेचने वाले का निकला जिसका कहना है कि किसी शख्स ने अपने पास मोबाइल न होने की बात कह कर उसे मोबाइल करने के लिये माँगा था। इस घटना से इस बात की आशंका और बढ़ जाती है कि
पीड़ित पत्रकार की बेटी किसी शातिर किस्म के अपराधी के चंगुल में फंस गई है। यह मामला अब किसी एक थाने तक सीमित न होने के कारण पीडित परिवार ने 7 जनवरी को एस.एस.पी. लखनऊ सिटी से मिलकर उन्हें पूरे मामले से लिखित में अवगत भी कराया, उन्होंने त्वरित कार्यवाही करने का भरोसा भी परिवार को दिया पर उसका सार्थक परिणाम अब तक सामने नहीं आया है,जब एक वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकार को न्याय मिलने में इतना विलम्ब हो सकता है तो आम जनता का क्या होगा?।
पीडित परिवार बार-बार यह आशंका जता रहा है कि पुलिस को घटना के क्षेत्रों एल्डिको-2 तथा बंथरा
में लगे सीसीटीवी कैमरों को देखना चाहिए। उनका कहना है कि बेटी एकता के पास दो माह पूर्व खरीदा एक नया मोबाइल भी है जिसे वह डिब्बे तथा उसमें रखी रसीद सहित ले गयी है। मोबाइल विक्रेता उस मोबाइल का एमआई नम्बर देने से इंकार कर रहा है। पुलिस यदि सख्ती करे तो मोबाइल का एमआई नम्बर मिल सकता है।
आगे परिवार का कहना है कि पुलिस द्वारा यदि त्वरित कार्यवाही नहीं की जाती है तो उनकी बेटी के साथ कोई भी गम्भीर घटना एवं दुर्घटना हो सकती है। युवती के पिता का यह भी कहना है कि उनकी बेटी मानसिक रूप से सामान्य बच्चों की तरह की नहीं है जिसकी वजह से अनहोनी की आशंका बहुत अधिक बढ़ जाती है। संदिग्ध अपराधी शादी का झांसा देकर तथा सरकारी नौकरी में होने की बात कहकर या बड़ी साजिश के तहत युवती का शारीरिक शोषण भी कर सकता है। लगातार चालाकी से अपनी पहचान छिपाकर वह पीडित परिवार तथा पुलिस को धोखे में रखकर किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है
, कोई भी सरकारी नौकरी करने वाला व्यक्ति इस तरह की अपराधिक गतिविधियों में अपने को संलग्न करके अपनी नौकरी को खतरे में नहीं डाल सकता है,
मेरा इस संबंध में समाज और सरकार से सीधा सवाल है कि ऐसी घटनाओं को अंजाम देकर परिवार-समाज और सामाजिक व्यवस्था को कब तक नेस्तनाबूत किया जाता रहेगा ?
व कब तक कानून का नाजायज़ लाभ उठाकर
"बहन-बेटियों का बहला-फुसला व अपहरण कर शादियां किये जाने का षडयंत्र होता रहेगा?
"कब तक शादी की मनमर्जी के नाम पर मां-बाप,परिवार की इज्जत की बर्बादी होती रहेगी?
"अरे समाज के ठेकेदारों जागो!
और बदलो पाश्चात्य सभ्यताओं को बढ़ावा देने वाले ऐसे विवाह कानून जो प्रेम विवाह के नाम पर समाज में नफ़रत फैलाने का काम कर रहे हों,क्या मनमर्जी और मां-बाप की इज्ज़त को सरेआम नीलाम करने वाली शादियां "प्रेम-विवाह हो सकती हैं, इन्हें प्रेम विवाह की संज्ञा कदापि न दी जाय,अभी कुछ दिन पूर्व एक राजनीतिज्ञ की बेटी के साथ भी ऐसा हुआ था,
लगता है ऐसी ही पुनरावृत्ति के लिए इस बेटी का अपहरण हुआ है,
जागो!समाज के पहरेदारों ! ऐसे मामलों का समर्थन करते-करते व चुप्पी साधते कहीं तुम्हारे साथ ऐसी घटना न हो जाय,
👍 पीड़ित माता-पिता की बेटी से करुण पुकार
प्रिय दुलारी बेटी ! तुम हमसे सम्पर्क करो!
ईश्वर उन्हीं की सहायता करता है, जो अपनी सहायता स्वयं
करने की कोशिश करते हैं!
जब तक तुम घर नहीं आओगी हम चैन से नहीं बैठेंगे,हम व तुम्हारी मम्मी,भाई सारे रिश्तेदार,मित्र बहुत परेशान हैं। हम तुम्हारी बहिन के कैंसर से डेढ़ साल पहले मृत्यु हो जाने से पहले से ही दुखी हैं,तुम्हें गुमराह कर तुम्हें व तुम्हारे परिवार को धोखा देने वाला तुम्हारा कदापि नहीं हो सकता है
कोई तुमसे
धोखाधड़ी
करके तुम्हारी मासूम भावनाओं से पिछले पांच दिनों से खेल रहा है।
बेटी तुम जहां भी हो
साहस से उसके चगुंल से मुक्त होने की कोशिश करो, तुम बहुत भोली हो। अपने विवेक व साहस को जगाओ। तुम जैसी भी हालत में घर आओगी तुम्हारा सदैव हार्दिक स्वागत है क्योंकि तुम मेरे जिगर का टुकड़ा हो। तुम्हारी परिवार तथा समाज को बहुत आवश्यकता है। तुम समाज की कम्प्यूटर के द्वारा बहुत उपयोगी सेवा कर रही थी। उसने इण्टरनेट के द्वारा ही तुमसे सम्पर्क बनाया है।
आजकल साइबर अपराध बड़ी संख्या में हो रहे हैं। तुम भी साइबर अपराध का शिकार हो गयी हो। तुम्हारे साथ का व्यक्ति तुम्हारे भविष्य तथा जीवन के लिए बहुत बड़ा खतरा है। वह तुम्हारा शोषण करके तुम्हें कहीं भी छोड़कर या किसी दूसरे अपराधी व्यक्ति को बेचकर भाग जायेगा। यह वह पुलिस से बचने के लिए अपना सबूत मिटाने के लिए तुम्हारी हत्या भी कर सकता है। क्या उसने तुम्हें अपने माता-पिता से मिलाया है? यदि नहीं तो क्यों सोचो? उसके घर वाले कैसे दूसरे की बेटी को इस तरह से अपने घर में रखे हैं। यह बहुत बड़ा अपराध है। तुम्हारे परिवार के लोग सदैव तुम्हारे साथ हैं।
👍 मीडिया जगत से सहयोग की अपील
प्रिय आत्मीय बन्धु/मीडिया बन्धुओं को बाइक से घूमते ये दोनों दिखाई पड़े पुलिस या हमें सूचित करें। हम केवल अपनी बेटी को सुरक्षित अपने घर में देखना चाहते हैं। इसके लिए हम बड़े से बड़ा बलिदान करने को तैयार है। ईश्वर उन्हीं की रक्षा करता है जो अपनी रक्षा स्वयं करने की कोशिश करते हैं। बेटी की फोटो मीडिया बन्धु, अपने न्यूज चैनल, समाचार पत्र, न्यूज पोर्टल, बाजार, दुकान में प्रचारित-प्रसारित करें। ताकि
बेटी का अपहरण करने वाला अपराधी पकड़ा जाये। कानून उसे सख्त सजा देगा। ताकि आगे से कोई बेटी से इतना बड़ा धोखा करने का कोई अपराधी साहस न करें।
दुखी माता-पिता
वरिष्ठ पत्रकार/साहित्यकार
पीके सिंह पाल एवं
श्रीमती यू सिंह
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2-पीड़ित पिता



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