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औरैया विजिलेंस जांच में फंस सकते कई और अफसर-देवकली ट्रस्ट,मत्स्य,ओवरलोडिंग औरैया रत्न-देखिए इस खास रिपोर्ट में

जिलाधिकारी के निलंबन के बाद,अन्य अफसरों पर विजलेंस का कसेगा शिकंजा-देखिए इस खास रिपोर्ट में
विजीलेंस की टीम ने एडीएम से लिए मत्स्य, देवकली ट्रस्ट के दस्तावेज
 
उत्तरप्रदेश न्यूज़ 21 संवाददाता औरैया। भ्रष्टाचार के मामले में निलंबित हुए जिलाधिकारी सुनील कुमार वर्मा के करीबियों पर शिकंजा कसने के साथ ही उनके कराए कामों की भी विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी है।
विजिलेंस टीम ने बुधवार देर शाम एडीएम कार्यालय पहुंचकर कई मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज कब्जे में लिए। ऐसे में तत्कालीन जिलाधिकारी समेत उनके करीबी लोगों की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं।
बुधवार को ककोर मुख्यालय स्थित एडीएम कार्यालय पहुंची विजिलेंस टीम ने एडीएम रेखा एस. चौहान से मत्स्य पट्टा के अलावा महाकालेश्वर देवकली व मां मंगला काली देवस्थान एवं गोवंश संवर्धन/संरक्षण ट्रस्ट से संबंधित दस्तावेज कब्जे में लिए।यही नहीं औरैया रत्न को लेकर भी शुरू हुई जांच के संबंध में विजिलेंस टीम ने संबंधित दस्तावेज भी कब्जे में लिए। ऐसे में औरैया रत्न पाने वाले लोग भी जांच के दायरे में आते दिखाई दे रहे हैं।इसमें किन मानकों के तहत औरैया रत्न पाने वालों को चुना गया है, चयनित लोगों को दी गई एक लाख रुपये की धनराशि कहां से आई आदि बिंदुओं पर जांच होने की संभावना है।
 
11 लोगों को दिया गया था औरैया रत्न
तत्कालीन जिलाधिकारी सुनील कुमार वर्मा की ओर से जिले में विभिन्न क्षेत्रों में महारथ हासिल करने वालों को पहली बार औरैया रत्न दिए जाने को लेकर योजना तैयार की गई।
इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला प्रशासन के अधिकारियों का पैनल गठित किया गया था। इसके लिए सार्वजनिक रूप से लोगों से औरैया रत्न दिए जाने को लेकर अपनी-अपनी उपलब्धियों सामाजिक कार्यों व विशेषताओं से संबंधित दस्तावेजों के साथ फाइल मांगी गई थी।
इसमें गठित टीम ने 11 लोगों को औरैया रत्न के लिए चुना था। चुने गए लोगों को ट्रस्ट की धनराशि से एक-एक लाख रुपये नकद व प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया था।
विजिलेंस जांच में फंस सकते कई और अफसर
आईएएस सुनील वर्मा के निलंबन के बाद विजिलेंस की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। मंगलवार से टीम जिले में कई बार आ चुकी है। इसमें डीएम के कार्यकाल में कराए गए विकास कार्यों, पट्टों से जुड़ी व अन्य सरकारी पत्रावलियां जब्त की गई हैं। इससे अब यह साफ हो रहा है कि जांच के दायरे में कई और अफसर भी हैं। इससे पूर्व में कराए गए कार्यों में लिप्त अधिकारी भी सकते में हैं।
ओवरलोडिंग मामले में कस सकता शिकंजा
खनन और ओवरलोडिंग के मामले में प्रशासन की नजरें टेढ़ी हो रही हैं। सूत्रों के मुताबिक खनन के दौरान देवकली चौराहे से रात में सैकड़ों की संख्या में ट्रक गुजरते थे। इसके लिए पुलिस तो तैनात की गई थी, लेकिन बाद में निलंबित जिलाधिकारी ने कुछ पीआरडी जवान तैनात कर दिए थे। उनकी तैनाती के बाद से अधिकारी भी ओवरलोडिंग पर कार्रवाई नहीं करते थे। माना जा रहा है कि इसमें कई विभाग संलिप्त थे।
विजिलेंस की टीम ने ट्रस्ट, यमुना नदी के मत्स्य पट्टों व औरैया रत्न से संबंधित सभी दस्तावेज मांगे थे। सभी दस्तावेज उन्हें उपलब्ध करा दिए गए हैं। औरैया रत्न के लिए चुने गए सभी लोगों को ट्रस्ट के पैसों से नकद धनराशि व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया था। इनमें से लगभग आधे लोगों ने नकद मिली धनराशि सरेंडर कर दी थी। - रेखा एस. चौहान, एडीएम, औरैया।
अब हुई विजिलेंस की कार्रवाई
शासन की ओर से भ्रष्टाचार के आरोप में तत्कालीन जिलाधिकारी सुनील कुमार वर्मा को निलंबित कर दिया गया था। यही नहीं इस पूरे प्रकरण में उनके करीबी कहे जाने वाले मखलू पांडेय, हरी नारायण तिवारी व उनके पार्टनर के प्रतिष्ठानों पर विजिलेंस टीम ने पहुंचकर तथ्य जुटाए। खान अधिकारी देशराज की ओर से उनके कोल्ड स्टोर में डंप मिली अवैध बालू को लेकर मखलू पांडेय के भाई सुरेश पांडेय के पुत्र के खिलाफ सदर कोतवाली में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई।

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