*शिक्षकों को बोर्ड परीक्षा में लगाये जाने से शिक्षा व्यवस्था हुई प्रभावित*
*एक-दो अध्यापकों के भरोसे हो रहीं परिषदीय विद्यालयों में परीक्षा*
*औरैया।* अपने घर पर अंधेरा और दूसरों के घर उजाला की कहावत बेसिक शिक्षा विभाग पर सटीक बैठती है। जी हां बेसिक स्कूलों में वार्षिक परीक्षा शुरू हुए 2 दिन बीत चुके हैं। वहीं अभी एक दिन दो दिन परीक्षाएं और चलनी हैं,उसके बाद रिजल्ट निर्माण होना है। परन्तु ज्यादातर विद्यालयों के अध्यापकों को बोर्ड परीक्षा डयूटी में लगा लिया गया है, वहीं बचे काफी अध्यापकों को एफएलएन ट्रेनिंग आदि के नाम पर बीआरसी पर बुलाया जा रहा है। अब सवाल यह उठता है, कि परिषदीय विद्यालयों में एक या दो शिक्षकों के सहारे क्या नकल विहीन व नियमावली के अनुरूप परीक्षा कराई जा सकती है, या सिर्फ खानापूर्ति करके बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
जानकारी हो कि परिषदीय विद्यालयों में 22 मार्च से परीक्षाएं शुरू हुई हैं। वहीं यूपी बोर्ड परीक्षाएं आज से शुरू होगी। जिनमें बड़ी संख्या में परिषदीय शिक्षक अपने विद्यालयों की परीक्षाओं को छोड़कर कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी करेंगें। वहीं औरैया ग्रामीण बीआरसी सहित कुछ अन्य बीआरसी पर शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे बेसिक स्कूल अध्यापकों से खाली हो गए हैं। अब सवाल प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच और जूनियर विद्यालयों में कक्षा 6-8 की परीक्षाएं एक या दो अध्यापक कैसे करा सकते हैं। वहीं इसी समय बीआरसी पर शिक्षकों का प्रशिक्षण कराने पर भी शिक्षक संघ ने नाराजगी व्यक्त की है। साथ ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से कुछ दिन प्रशिक्षण स्थगित करने की मांग की है।
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