*दलों के जादुई चुनावी घोषणापत्र बोटरों को फंसाने के हैं यंत्र*
*हर बार झूठे घोषणा पत्रों से ऊबी जनता कुछ दलों का करेगी साफ पत्ता*
*बिधूना,औरैया।* बिधूना व दिबियापुर विधानसभा क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणा पत्र गौड नजर आ रहे है यहां जातीय समीकरण व स्थानीय मुद्दे जोर मारते नजर आ रहे हैं। अब तक के अधिकांश झूठे निकले चुनावी घोषणा पत्रों से अपने को छला महसूस कर रहे मतदाता इस बार इन घोषणा पत्रों को जादुई चुनावी घोषणा पत्रों को लुभाने का यंत्र मानकर इन पर फिलहाल ध्यान देते नजर नहीं आ रहे हैं। बिधूना विधानसभा क्षेत्र में पॉलिटेक्निक कॉलेज की मांग पूरी न होने रोडवेज बस स्टेशन बनने के बावजूद शुरू न होने सहकारी शीतगृह पेपर मिल खेलकूद स्टेडियम की स्थापना न होने व दिबियापुर विधानसभा क्षेत्र में अधिकांश चुनाव जीतने वाले नुमाइंदों द्वारा अपने चहेतों व अपने परिजनों को गैल एनटीपीसी जैसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों में ठेकेदारी का काम दिलाने के साथ अपने 5 वर्ष के कार्यकाल में गांवों के विकास पर ध्यान न देने और अधिकांशतः अपने स्वजातीय लोगों चापलूसों से घिरे रहने के चलते इस वार मतदाताओं में फिलहाल खासी नाराजगी देखने को मिल रही है। सभी राजनीतिक दलों के साथ चुनावी समर में डटे प्रत्याशियों द्वारा अपने-अपने घोषणा पत्र की लाभकारी बातें परोस कर मतदाताओं को लुभाने का भरसक प्रयास किया जा रहा है लेकिन इस बार इन घिसे पिटे घोषणा पत्रों की बातों पर लोग भरोसा करते नजर नहीं आ रहे हैं। इन दोनों ही क्षेत्रों में फिलहाल जातीय समीकरणों के साथ स्थानीय मुद्दे हावी होते नजर आ रहे हैं।
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