Top News

औरैया जनपद का सियासी समीकरण

औरैया जनपद का सियासी समीकरण:

*मजबूत किलेबंदी नहीं होने पर भाजपा खो सकती है जनपद की तीनों सीटें*

*अंतर्द्वंद और टिकट पाने से उपेक्षित समर्थकों द्वारा हो रहा है भाजपा का भारी विरोध*

*भाजपा नेता की कारगुजारियों से ही औरैया में नहीं बन सका रोडवेज डिपो*

*औरैया।* विधानसभा चुनाव 2022 के लिए भाजपा में तीनों विधानसभाओं पर टिकट पाने के लिए पुराने कद्दावर नेताओं को आशा और उम्मीद थी, कि उन्हें इस बार विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया जाएगा, लेकिन तीनों विधानसभाओं में टिकट आवंटन के बाद भाजपा के कद्दावर नेताओं को उस समय बड़ा झटका लगा जब भाजपा हाईकमान ने ऐसे प्रत्याशियों को टिकट दे दिए जो पार्टी में नए नवेले हैं,  और राजनीति से कोई सरोकार नहीं है, अथवा उन्हें जनता जानती ही नहीं है, और जिन्हें जानती भी है उनका अपनी ही विधानसभा में घोर विरोध है। मुख्यमंत्री के आगमन के बावजूद टिकट नहीं मिलने को चलते भाजपा ऐन वक्त पर चुनावी समीकरणों में पछडती हुई दिखाई दे रही है। संभावना व्यक्त की जाती है, कि जनपद की तीनों सीटें भाजपा की झोली से इतर जा सकती हैं। अंतर्द्वंद और टिकट पाने से उपेक्षित भाजपा नेता मुखर तो नहीं हो रहे हैं , लेकिन उनके समर्थक भाजपा का अंदर खाना विरोध कर रहे हैं। जिसके चलते भाजपा की नैया चुनावी बैतरणी पार करने में जद्दोजहद कर रही है। इतना ही नहीं औरैया में बनने वाला रोडवेज बस डिपो भी भाजपा के नेता द्वारा उचित सुझाव के अभाव में दिबियापुर चला गया। जिसका तमाम संगठनों ने विरोध किया था, लेकिन किसी की नहीं चली। इसको लेकर भी भाजपा अंतर्द्वंद से  चारों तरफ से घिरी हुई है। इतना ही नहीं सियासी समीकरण के तहत सपा के गढ़ में फिर से सीट बचाने की रणनीति के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी क्षत्रिय बाहुल्य जगहों को सभा के लिए चुना, लेकिन यह कवायद भी सफल होती नजर नहीं आई। योगी आदित्यनाथ के जाने के बाद दूसरे दिन ही दो दर्जन भाजपाई ब्राह्मणों ने सपा का दामन थाम लिया। जिससे स्पष्ट होता है, कि भाजपा का वर्चस्व ब्राह्मणों से भी उठता जा रहा है। इसके अलावा  जनपद का बैकवर्ड भी भाजपा का साथ देने को तैयार नहीं दिख रहा है। बिधूना में मायावती के आगमन के बाद दलित मतदाता भी एकजुट होते हुए बसपा प्रत्याशियों के पक्ष में बिगुल बजाते दिखाई दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में भाजपा का जनाधार विधानसभा की तीनों सीटों से तेजी के साथ खिसकता जा रहा है। यदि ऐसा ही रहा तो जनपद की तीनों विधानसभा सीटें अन्य दलों के खाते में जा सकती हैं।
सपा के गढ़ औरैया में 2017 में मोदी लहर में तीनों सीटें भाजपा ने कब्जा कर ली थी। बिधूना और दिबियापुर ऐसी सीटें थी जो सपा बहुत कम अंतर पर हारी थी। इस बार सपा अपनी इन तीनों सीटों को पाने के लिए नई-नई रणनीति अपना रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने औरैया की दो विधानसभा सीटें जनसभा के लिए चुनी। जोकि दोनों जगह बिधूना एवं अजीतमल क्षत्रिय बाहुल्य हैं। उपरोक्त जगह पर मुख्यमंत्री ने क्षत्रिय मतदाताओं को एकजुट करने का प्रयास किया। बिधूना विधानसभा से बसपा ने क्षत्रिय प्रत्याशी गौरव रघुवंशी को उतारा है। जबकि दिबियापुर विधानसभा क्षेत्र से कृषि राज्य मंत्री लाखन सिंह राजपूत तथा औरैया सुरक्षित से गुड़िया कठेरिया को अपना प्रत्याशी बनाया है। औरैया से  भाजपा के समर्पित सिपाही पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष क्षत्रिय नेता दीपू सिंह के जेल जाने से 2 जातियों में तनाव के कारण भाजपा पर इंफैक्ट पड़ सकता है। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विगत दिवस क्षत्रिय मतदाताओं को रिझाकर एकजुट करने का प्रयास वेशक किया। लेकिन जनता जनार्दन को भाजपा की ओर नहीं मोड़ सके। जिससे भाजपा की चुनावी नैया डावाडोल प्रतीत हो रही है। वही चुनावी हवा को देखकर ब्राह्मण मतदाता भी समाजवादी पार्टी का दामन थामने लगे हैं। इतना ही नहीं गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले भाजपा नेता मदन गौतम के समर्थक भी मदन गौतम को टिकट नहीं मिलने के कारण भाजपा का विरोध कर रहे हैं।
      सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे समर्थकों की भाजपा के प्रति नाराजगी यह है कि औरैया विधानसभा का टिकट मदन गौतम को नहीं दिया गया। टिकट नहीं मिलने से बौखलाए मदन गौतम के समर्थक सोशल मीडिया पर मदन को भी टैग कर रहे हैं। भाजपा शासनकाल में मदन गौतम का अवैध निर्माण ढहाया गया था। औरैया विधानसभा के टिकट के लालच में मदन गौतम ने  पाला बदलते हुए भाजपा का दामन थाम लिया था। भाजपा ने औरैया से गुड़िया कठेरिया को भाजपा प्रत्याशी बनाया है सत्ताधारी दल के कुछ  लोग राजनीति में गुड़िया को गुड़िया ही मान रहे हैं। इसी तरह से ही विधानसभा दिबियापुर में भाजपा प्रत्याशी लाखन सिंह का भी विरोध किसी से छिपा नहीं है। यहां तक की जनता उनके समर्थकों को गांव में घुसने भी नहीं दे रही है। बिधूना विधानसभा में बसपा द्वारा क्षत्रिय प्रत्याशी उतारने पर भाजपा का जनाधार घटने से इंकार नहीं किया जा सकता है। बिधूना विधानसभा में ऐसे कई नेता थे , जो टिकट की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन भाजपा ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। इसके चलते भी भाजपा अंतर्द्वंद से जूझ रही है। यह चुनावी नतीजे ही बताएंगे की चुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा।

Post a Comment

If You have any doubts, Please let me know

और नया पुराने